ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा था पाकिस्तान का आसिफ? ईरान के लिए काम करने का आरोप- मुकदमा शुरू

अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि आसिफ मर्चेंट नाम के इस शख्स के ईरान सरकार से संबंध थे और वह न्यूयॉर्क गया था ताकि उन लोगों से मिले जिन्हें वह अमेरिका की जमीन पर एक राजनेता की हत्या करने के लिए भर्ती कर रहा था.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और आसिफ मर्चेंट की तस्वीर
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  • आसिफ मर्चेंट नामक पाकिस्तानी व्यक्ति पर अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है
  • मर्चेंट का ईरान सरकार से संबंध था और वह न्यूयॉर्क में हत्या के लिए शूटरों को भर्ती कर रहा था- अमेरिकी अभियोजक
  • मर्चेंट ने शूटरों को पांच हजार डॉलर भुगतान किया और ट्रंप की रैलियों की जगहों की जांच की थी- अमेरिकी अभियोजक
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डोनाल्ड ट्रंप की संभावित हत्या की साजिश में शामिल एक पाकिस्तानी व्यक्ति के खिलाफ इस हफ्ते मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई है. अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि आसिफ मर्चेंट नाम के इस शख्स के ईरान सरकार से संबंध थे और वह न्यूयॉर्क गया था ताकि उन लोगों से मिले जिन्हें वह अमेरिका की जमीन पर एक राजनेता की हत्या करने के लिए भर्ती कर रहा था. संभवतः उसके निशाने पर डोनाल्ड ट्रंप थे, जो उस समय राष्ट्रपति के चुनाव के लिए रैलियां कर रहे थे.

एपी की रिपोर्ट के अनुसार 47 साल के आसिफ मर्चेंट पर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगे हैं. दोषी पाए जाने पर उन्हें उम्रकैद की सजा हो सकती है. आसिफ मर्चेंट पर मुकदमा बुधवार को ब्रुकलिन की एक संघीय अदालत में शुरू हुआ.

आखिर पाकिस्तानी व्यक्ति पर क्या आरोप हैं?

अभियोजकों ने अदालत में बताया कि अप्रैल 2024 में न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद मर्चेंट जिन लोगों से मिला था, उनमें से एक ने बाद में अधिकारियों को इस साजिश की जानकारी दी और वह गुप्त मुखबिर बन गया. 

अदालत में दिखाई गई एक वीडियो और एक गवाह के बयान के अनुसार, जून 2024 में मर्चेंट ने होटल के एक नैपकिन पर चीजें रखकर एक योजना समझाई थी. इस योजना में किसी राजनीतिक नेता को रैली के दौरान गोली मारना और फिर हत्यारे को भागने में मदद करने के लिए वहां विरोध प्रदर्शन करवाकर ध्यान भटकाना शामिल था. बीच में मदद करने वाले व्यक्ति नदीम अली ने ब्रुकलिन की संघीय अदालत में गुमनाम जूरी से कहा, “मैं हैरान रह गया था.” अली ने बताया कि दो दिनों की बातचीत में मर्चेंट ने उससे शूटरों की व्यवस्था करने को कहा. अभियोजकों ने अदालत में वे ऑडियो रिकॉर्डिंग भी चलाईं, जो अली ने चुपके से एफबीआई के लिए रिकॉर्ड की थीं.

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मर्चेंट बाद में उन कथित शूटरों से मिला और उन्हें शुरुआती भुगतान के रूप में 5,000 डॉलर दिए. लेकिन वह उन्हें निशाने का नाम बताने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया. सहायक अमेरिकी वकील नीना गुप्ता ने अदालत में कहा कि मर्चेंट ने अली से कहा था कि निशाना “कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पाकिस्तान और मुस्लिम दुनिया को नुकसान पहुंचा रहा है.” पिछले महीने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में अभियोजकों ने कहा कि मर्चेंट के लैपटॉप पर ट्रंप की रैली की जगहों के बारे में खोज की गई थी. सरकार ने यह नहीं बताया कि उसने और कितने संभावित निशानों पर विचार किया था.

एफबीआई ने पहले भी ऐसे कई हमलों को नाकाम किया है, जहां एजेंट आतंक समर्थकों का रूप लेकर सलाह या सामान उपलब्ध कराते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका कभी-कभी मानसिक रूप से कमजोर लोगों को फंसाने जैसा हो सकता है, जो अपने दम पर ऐसा कदम नहीं उठा सकते.

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