कुत्तों का दिमाग 5000 साल पहले होने लगा था छोटा, इसके पीछे इंसानों से दोस्ती तो वजह नहीं?

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि कुत्तों का दिमाग भेड़ियों (वुल्फ) से छोटा होता है. अब जानिए कब दोनों में अंतर जाने लगा.

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कुत्तों का दिमाग 5000 साल पहले होने लगा था छोटा, नई रिसर्च में खुलासा

अगर आपको लगता है कि आपका कुत्ता कभी-कभी बेवकूफी भरी हरकत करता है, तो अब उसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी हो सकता है. नई रिसर्च में पता चला है कि कम से कम 5000 साल पहले कुत्तों का दिमाग छोटा होना शुरू हो गया था. लेकिन रुकिए इसका मतलब यह नहीं है कि कुत्ते मूर्ख हैं. असल कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों के साथ रहते-रहते कुत्तों का दिमाग बदला जरूर, लेकिन उसी के साथ वे इंसानों को समझने और उनसे जुड़ने में और भी माहिर हो गए. यह रिसर्च “रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस” जर्नल में छपी है.

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि कुत्तों का दिमाग भेड़ियों (वुल्फ) से छोटा होता है. अब नई रिसर्च बताती है कि कुत्तों का दिमाग कम से कम 5,000 साल पहले से छोटा होना शुरू हो गया था. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिसर्च से यह समझने में मदद मिलती है कि कुत्ते कैसे इंसानों के साथ रहकर पालतू बने. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार यह रिसर्च यह नहीं बताती कि आपका पालतू कुत्ता कीचड़ वाले पानी में ही क्यों पीना पसंद करता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिमाग छोटा होने का मतलब यह नहीं है कि कुत्ते अपने भेड़िया जैसे पूर्वजों से कम समझदार हैं.

इस रिसर्च के मुख्य लेखक डॉक्टर थॉमस कुक्की फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च से आते हैं. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “आजकल कुत्तों को अपनी पूरी बुद्धि दिखाने का मौका नहीं मिलता. लेकिन वे बहुत समझदार होते हैं. पालतू बनने से वे मूर्ख नहीं हुए, बल्कि वे इंसानों को समझने और उनसे बात करने में और बेहतर हो गए हैं.”

इंसानों और कुत्तों का रिश्ता बहुत पुराना है. शोध के अनुसार, पालतू कुत्तों के सबसे पुराने सबूत 15,000 साल से भी ज्यादा पुराने हैं.

आमतौर पर माना जाता है कि दिमाग का छोटा होना पालतू बनने की पहचान होती है. लेकिन इस बात पर लंबे समय से बहस चल रही है कि कुत्तों का दिमाग भेड़ियों से छोटा कब हुआ. कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव बहुत पहले ही शुरू हो गया था, जबकि कुछ का कहना है कि यह बदलाव पिछले 200 सालों में अलग-अलग नस्लों के बनने के कारण हुआ.

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कैसे किया गया रिसर्च

इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने 35,000 साल से लेकर 5,000 साल पुराने 22 भेड़ियों और कुत्तों की खोपड़ी के सीटी स्कैन देखे. इसके अलावा 59 आधुनिक भेड़ियों और 104 आधुनिक कुत्तों की खोपड़ी के स्कैन भी शामिल किए गए. इनमें अलग-अलग नस्लों के कुत्ते, आवारा (गांव में रहने वाले) कुत्ते और डिंगो भी शामिल थे. वैज्ञानिकों ने इन स्कैन के जरिए यह देखा कि समय के साथ कुत्तों के दिमाग का आकार कैसे बदला.

रिसर्च में पाया गया कि आज के कुत्तों (नस्ल वाले, डिंगो और गांव के कुत्ते) और लेट निओलिथिक समय के कुत्तों का दिमाग, प्राचीन और आधुनिक भेड़ियों की तुलना में लगभग 32% छोटा है. और खास तौर पर, करीब 5,000 से 4,500 साल पहले के कुत्तों का दिमाग उसी समय के भेड़ियों से 46% छोटा था. उनका दिमाग आज के पग नस्ल के कुत्तों जितना छोटा था. आगे की जांच में यह भी पाया गया कि शरीर के आकार को ध्यान में रखने के बाद भी इन कुत्तों का दिमाग भेड़ियों से काफी छोटा था.

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हालांकि, वैज्ञानिकों को ऐसे दो जानवरों में- जो 35,000 और 15,000 साल पहले इंसानों के साथ रहते थे (जिन्हें “प्रोटो-डॉग” कहा जाता है)- दिमाग छोटा होने के सबूत नहीं मिले. बल्कि, उनमें से एक का दिमाग थोड़ा बड़ा था. इससे यह संभावना भी बनती है कि शुरुआत में पालतू बनने के दौरान दिमाग का आकार बढ़ा भी हो सकता है. डॉक्टर कुक्की ने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि पालतू बनने से कुत्तों का शरीर और दिमाग दोनों क्यों छोटे हो गए.

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