- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना मंजूरी के गुजरने वाले चीनी जहाज को वापस लौटाया और रास्ता बदलना पड़ा
- मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने बताया कि हर जहाज को अलग-अलग अनुमति लेना अनिवार्य होती है
- भारत के दो जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने ईरान के राजदूत को विदेश सचिव से मुलाकात के लिए तलब किया
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चीनी जहाज को भी वापस लौटा दिया है. इजाजत नहीं मिली तो जहाज को अपना रास्ता बदलना पड़ा. मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी. बताया गया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से चीनी जहाज को वापस लौटा दिया. बिना मंजूरी किसी भी जहाज को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
आगे लिखा कि ‘सन प्रोफिट' नाम के चीनी जहाज को इजाजत नहीं मिलने के बाद रास्ता बदलना पड़ा. ईरान ने साफ किया कि वह किसी भी देश के जहाज को ‘ब्लैंकेट अप्रूवल' (एक को अनुमति के आधार पर सभी को मंजूरी) नहीं देता. हर जहाज को अलग से मंजूरी लेनी होती है.
शनिवार को ही भारत के दो जहाजों पर फायरिंग की खबर आई थी. इसका संज्ञान लेते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान भी जारी किया था. विदेश सचिव से ईरानी राजदूत को तलब किए जाने का इसमें जिक्र था और भारत की फिक्र से भी उन्हें अवगत कराया गया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर भारत की ईरानी राजदूत से हुई बात का जिक्र किया. बयान में लिखा-
अब देखना ये है कि चीन इस पर क्या रिएक्शन देता है. चीन वर्तमान में ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% से अधिक हिस्सा खरीदता है. 2025 में, चीन ने प्रतिदिन लगभग 1.38 से 1.4 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का लगभग 12-13% से अधिक है. यह व्यापार अक्सर भारी छूट ($8-$10 प्रति बैरल) पर होता है.
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