ट्रंप का आज जिया जले! 42% आबादी, 31% अर्थव्यवस्था वाले नेता... चीन में दुनिया के 'पावर बैलेंस' का सीन समझिए

ट्रंप के मनमाने टैरिफ से आर्थिक उथलपुथल के बीच चीन में SCO समिट में जुट रहे देशों की सामूहिक ताकत देखें तो यह दुनिया की कुल आबादी का करीब 49% और ग्लोबल इकोनोमी का लगभग 31% बैठती है.

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  • टैरिफ अटैक से दुनिया को हड़का रहे ट्रंप को एससीओ के देश सामूहिक ताकत से आईना दिखाएंगे
  • SCO के सदस्य देशों की कुल GDP 26.8 ट्रिलियन डॉलर है, जो दुनिया की इकोनोमी का लगभग 22.5% है
  • एससीओ के 10 सदस्य देशों में दुनिया की लगभग 42% आबादी यानी लगभग 3.44 अरब लोग रहते हैं
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शंघाई सहयोग संगठन (SCO). वैसे तो ये एक क्षेत्रीय संगठन है जो सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एशियाई देशों को एक मंच पर लाता है, लेकिन इस बार चीन के तियानजिन शहर में जब इसके सदस्य देश 25वें शिखर सम्मेलन के लिए जुटेंगे तो एक नया संदेश देंगे. ये सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मनमाने टैरिफ से दुनिया में आर्थिक उथलपुथल के हालात हैं. एससीओ के देश सामूहिक ताकत से ट्रंप को आईना दिखाएंगे. एससीओ से जुड़े देशों का दुनिया का कुल आबादी में करीब  49% और ग्लोबल इकोनोमी में लगभग 31% हिस्सा है. 

पीएम मोदी, जिनपिंग, पुतिन पर निगाहें

एससीओ का 25वें शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन में होना है. इस दो दिवसीय सम्मेलन के लिए पीएम मोदी भी चीन पहुंच गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी 7 साल के बाद चीन पहुंचे हैं. हालांकि 2023 और 2024 में उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से विदेश में दो बार मुलाकात हो चुकी है. एससीओ समिट के इतर पीएम मोदी की शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ अलग से बैठकें होंगी. इन बैठकों पर ट्रंप समेत पूरी दुनिया की निगाहें लगी हैं. 

SCO में वैश्विक इकोनोमी का 31%

एससीओ के सदस्य देश की एकजुट ताकत एक अलग ध्रुव का प्रतीक है. इसके 10 सदस्य देशों की सम्मिलित आर्थिक एकता का दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा है. आईएमएफ के 2025 के अनुमानों के अनुसार, इसके 10 सदस्य देशों की कुल जीडीपी लगभग 26.8 ट्रिलियन डॉलर है. दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था का यह लगभग 22.5% बैठता है. इस तरह यह G7 (लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर) और नाटो (लगभग 36 ट्रिलियन डॉलर) से कुछ ही पीछे है. अगर इसके पर्यवेक्षक और संवाद सहयोगियों की ताकत भी जोड़ ली जाए तो मजबूती में इसका कोई तोड़ नहीं है. इसी तरह अगर एससीओ देशों की कुल जीडीपी देखें तो यह लगभग 36 ट्रिलियन डॉलर है. पूरी दुनिया की कुल 110 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी में इसका हिस्सा लगभग 31 पर्सेंट का बनता है. 

दुनिया की 49% आबादी SCO में 

एससीओ की ताकत उसकी जीडीपी में ही नहीं बल्कि उसकी आबादी में भी है. इन 10 सदस्य देशों में दुनिया की लगभग 42% आबादी रहती है, यानी लगभग 3.44 अरब लोग. भारत और चीन दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं. एससीओ के सभी देशों की कुल आबादी करीब 4 अरब होती है. अगर दुनिया की कुल लगभग 8.1 अरब की आबादी की इससे तुलना करें तो यह करीब 49 फीसदी बैठती है. आबादी के लिहाज से भारत एक बहुत विशाल बाजार है. अमेरिका समेत कोई भी देश उसे नजरंदाज करने का जोखिम नहीं ले सकता.  

चीन, भारत, रूस सबसे बड़े खिलाड़ी

एससीओ की आर्थिक ताकत का बड़ा हिस्सा इसके तीन सबसे बड़े सदस्य देशों से आता है. चीन की जीडीपी 19 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है, जो ग्रुप की कुल जीडीपी का 70% से अधिक है. इसके बाद, भारत का योगदान 4.2 ट्रिलियन डॉलर और रूस का योगदान करीब 2.1 ट्रिलियन डॉलर है. ये तीनों मिलकर संगठन की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 9-10वां हिस्सा बनाते हैं. बाकी सदस्य जैसे ईरान, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, किर्गिज गणराज्य और ताजिकिस्तान का कुल योगदान 15% से भी कम है.

SCO भले ही सबसे बड़ा आर्थिक समूह न हो, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है. जी7 यानी दुनिया के 7 सबसे शक्तिशाली देशों की जीडीपी 30 ट्रिलियन डॉलर मानी जाती है. नाटो देशों की कुल जीडीपी 35 ट्रिलियन है. विस्तारित BRICS की जीडीपी देखें, जिसमें भारत, रूस, चीन भी शामिल हैं, तो वह लगभग 48 ट्रिलियन डॉलर बैठती है. 

SCO आखिर है क्या? 

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एशियाई देशों की एक ताकतवर आवाज है. यह एक बहुपक्षीय अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी. इसकी जड़ें 1996 में बने "शंघाई 5" ग्रुप से निकली हैं, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे. बाद में भारत, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस जैसे देश भी इसमें शामिल हुए. इस तरह यह 10 स्थायी सदस्य देशों का समूह बन चुका है. इसके अलावा इससे 2 पर्यवेक्षक और 14 संवाद भागीदार देश भी जुड़े हुए हैं. भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है. वह 2022-23 के दौरान संगठन का अध्यक्ष पद भी संभाल चुका है.

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इसका मकसद क्या है?

SCO का मकसद सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, यह एक बहुआयामी सहयोग मंच है, जो इन मुद्दों पर भी काम करता है- 

  • सुरक्षा व आतंकवाद से मुकाबला करना
  • राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना
  • वैज्ञानिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान
  • ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग
  • क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि को सुनिश्चित करना
  • न्यायसंगत और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देना

ट्रंप के टैरिफ अटैक का तोड़?

दुनिया पर ट्रंप के टैरिफ अटैक के मद्देनजर एससीओ की यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ट्रंप ने भारत पर 50 पर्सेंट तो चीन पर 30 पर्सेंट टैरिफ लगाए हैं. इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल के गाजा पर हमले का भी साया है. एससीओ ने अब सुरक्षा से आगे बढ़कर ट्रेड और ग्लोबल साउथ की समस्याओं पर भी ध्यान दिया है. ऐसे माहौल में एससीओ के आर्थिक रूप से एकजुट होने की कोशिशें काफी मायने रखती हैं. एससीओ देश एक-दूसरे के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाकर अमेरिकी टैरिफ के दबाव का तोड़ निकाल सकते हैं. 

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