खाड़ी में जंग के बीच ईरान के स्कूल पर मिसाइल अटैक करके अमेरिका बुरी तरह घिर गया है. हमले में करीब 165 मासूम बच्चियों की मौत को लेकर ट्रंप सरकार की खूब फजीहत हो रही है. अब इसे लेकर ईरान के दोस्त चीन ने नया दांव चलते हुए अमेरिका को घेरा है. चीन ने पीड़ित परिवारों के लिए वित्तीय सहायता का ऐलान करके कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका के ऊपर दबाव बना दिया है.
मृत छात्राओं के परिजनों के लिए मदद का ऐलान
चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के मिनाब स्थित एलिमेंट्री स्कूल पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक में मारी गई छात्राओं के परिजनों को आपातकालीन मानवीय सहायता के रूप में वह 2 लाख डॉलर (लगभग 1.6 करोड़ रुपये) देगा. यह राशि चीन की रेड क्रॉस सोसाइटी की तरफ से ईरान की रेड क्रॉस सोसाइटी को दी जाएगी. यह राशि खासतौर से इस हमले में अपने बच्चों को खोने वाले परिजनों की मदद और मुआवजे के लिए दी जा रही है.
अंधाधुंध हमलों की निंदा करते हुए सुनाया
चीन सरकार ने इस मदद का ऐलान हुए अमेरिका को खूब सुनाया. चीनी प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने ईरानी स्कूल पर हमले में छात्राओं की मौत पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि हम नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर होने वाले सभी अंधाधुंध हमलों की कड़ी निंदा करते हैं. स्कूलों को निशाना बनाना और बच्चों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है. इसने मानवीय नैतिकता और अंतरात्मा की सीमाओं को लांघ दिया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने की अपील
चीन सरकार ने सभी तरह के मिलिट्री ऑपरेशन तुरंत रोकने की अपील की है ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके और मिडिल ईस्ट की उथलपुथल से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके. चीन ने मानवीय भावना के साथ ईरान और ईरान के लोगों की मदद का भी भरोसा दिलाया.
अमेरिकी सेना की गलती से हुआ था हमला
गौरतलब है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने खुलासा किया था कि ईरानी स्कूल पर अमेरिका की टोमाहॉक मिसाइल से हमला किया गया था. ये हमला अमेरिकी सेना की गलती से हुआ था. सेना ने पुरानी खुफिया सूचनाओं के आधार पर स्कूल की बिल्डिंग का टारगेट पहले से लॉक कर रखा था. दरअसल मिनाब का ये स्कूल ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) बेस के नजदीक है. इस मामले में इजरायल भी अपना पल्ला झाड़ चुका है और कह चुका है कि इससे उसका लेना-देना नहीं है.
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