- भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान तीन दिन के आधिकारिक दौरे पर पहली बार ब्रिटेन पहुंचे हैं
- इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण और उद्योग साझेदारी को मजबूत करना है
- दोनों देशों ने दस साल के रक्षा रोडमैप पर सहमति जताई है, जिसका लक्ष्य सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है
ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध और दुनिया भर के बदलते रक्षा-समीकरणों के बीच भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान तीन दिन के अधिकारिक दौरे पर ब्रिटेन पहुंच गए हैं. संयोग से ये ऐसा समय है जब नाटो में टूटन बढ़ रही है और अमेरिका और ब्रिटेन अरसे बाद युद्ध के मसले पर एक-दूसरे से दूर दिख रहे हैं. ऐसे में भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा-संबंध अचानक और अहम हो गए हैं. वैसे भी पहली बार भारत का कोई सीडीएस ब्रिटेन पहुंचा है. सीडीएस की यह यात्रा मजबूत भारत-ब्रिटेन रक्षा साझेदारी का संकेत है.
भारत‑यूके रक्षा सहयोग पर फोकस
इस दौरे का उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है. इसमें ट्रेनिंग, ऑपरेशन और रक्षा उद्योग सहयोग शामिल है. रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा. ब्रिटेन की रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि भी उनसे बातचीत करेंगे. दोनों देश रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. ब्रिटिश कंपनियों के साथ मिलकर भारत में डिफेंस सेक्टर में निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है. इससे भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है. साथ ही इंटेलिजेंस यानी खुफिया सहयोग पर भी काम होगा. साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाया जाएगा. रणनीतिक संचार पर भी चर्चा होगी. संयुक्त सैन्य अभ्यास को और आगे बढ़ाया जाएगा.
ये भी पढ़ें : दुश्मन की हर चाल पर 'अजीत' की नजर! सेना को मिले बेहद खास 500 हाई-टेक ड्रोन, जानिए इसकी खासियत
पांचवीं बड़ी सैन्य बातचीत, साझा अभ्यास पर जोर
जनरल चौहान रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज का दौरा भी करेंगे. वहां वह अलग-अलग देशों के छात्रों से मिलेंगे. दोनों देशों के बीच इस साल यह पांचवीं बड़ी सैन्य बातचीत है. इससे पहले मार्च में ब्रिटेन के एयर चीफ भारत आए थे. ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी दिखाता है. भारत ब्रिटेन का अहम रक्षा साझेदार है. वहीं ब्रिटिश रक्षा सलाहकार कमोडोर क्रिस सॉन्डर्स ने कहा कि यह यात्रा रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी. दोनों देश मिलकर ट्रेनिंग और उद्योग में आगे बढ़ेंगे.
10 साल के रोडमैप से बढ़ी रणनीतिक साझेदारी
ब्रिटेन और भारत ने 10 साल का रक्षा रोडमैप बनाया है, इसका लक्ष्य सुरक्षा और विकास बढ़ाना है. 2026 में भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षक ब्रिटेन में तैनात किए गए. इससे पहले 2025 में दोनों देशों ने बड़ा नौसैनिक अभ्यास किया. इसमें एयर और सेना के संयुक्त अभ्यास भी शामिल थे. वैसे जनरल चौहान का यह दौरा दोनों देशों के बीच भरोसे को मजबूत करता है. साथ ही वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता दिखाता है. भारत और यूके मिलकर नई चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाये रखने पर भी अहम चर्चा होगी.














