भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच अगले साल से चलने वाली है, लेकिन चीन ने तो अब पहाड़ों में भी बुलेट ट्रेन दौड़ा दी है. चीन ने किनलिंग पहाड़ों को काटकर सिर्फ 4 साल में नया हाई स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार किया है. चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने शियान और जिनयान शहरों के बीच 257 किलोमीटर ये लंबी लाइन बनाई है, जहां 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेगी. ये बुलेट ट्रेन कई सुरंगों और पुलों से गुजरेगी और उत्तर पश्चिमी के बड़े शहरों को यांगजी नदी के पार के इलाकों से जोड़ेगी.
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का रूट
ये नई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर चीन के शांग्जी प्रांत की राजधानी शियान को पड़ोस के हुबेई प्रांत के जिनयान शहर से जोड़ती है. साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट के अनुसार, हाईस्पीड रेल लाइन ने 257 किलोमीटर लंबे रूट पर सफर को 6 घंटे कम कर दिया है. वहीं शियान और हुबेई की राजधानी वुहान 800 किमी के सफर का समय सिर्फ 5-6 घंटे से घटाकर 2 घंटे 41 मिनट रह जाएगा. किनलिंग पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ इलाके को काटकर बुलेट ट्रेन निकालना बहुत मुश्किल था.
Bullet Train in China
बुलेट ट्रेन के लिए चीन ने खोला खजाना
चीन ने 7 अरब डॉलर यानी करीब 66600 करोड़ रुपये खर्च कर ये हाईस्पीड रेल कॉरिडोर खड़ा कर दिया. किनलिंग पहाड़ी उत्तर और दक्षिण चीन के हिस्से को अलग करती है. पहाड़ों के साथ यांगजी, हानशियांग नदी भी इनके बीच बहती हैं. शिन्हुआ की रिपोर्ट में प्रोजेक्ट के मुख्य डिजायनर माओ लेई ने कहा कि यह रेलवे पूरे रूट का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पुलों और सुरंगों से बना है.
चीन की बुलेट ट्रेन की स्पीड देखो
बुलेट ट्रेन रूट में 42 सुरेंगे और 62 पुल
पहाड़ों, खाईं के बीच इस बुलेट ट्रेन लाइन में 42 सुरंगें और 62 पुल बने हैं, जो 244 किलोमीटर रूट का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है. ऐसे इलाके में बुलेट ट्रेन चीन के रेलवे और इंजीनियरिंग के लिए बड़ी चुनौती भरी परीक्षा थी. यह बुलेट ट्रेन रूट से हांकू-शियां हाईस्पीड रेलवे से जुड़ती है. इससे शांग्जी प्रांत के शियान और हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान के बीच ढाई घंटे में सफर होगा.
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चीन का सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट
रेलवे प्रोजेक्ट में चाइना रेलवे वुहान ग्रुप के शियांगयांग पावर सप्लाई सेक्शन अफसर जी डेक्सू ने इसे क्रांतिकारी बताया है. ये ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में क्रांति लाएगा. रेलवे सिग्नलिंग टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट इंजीनियर चेन केयू ने सुरंगों के अंदर सिग्नल बेस स्टेशन बने हैं. सुरंग की दीवारों पर डिजाइन केबल हैं, जो रेल ट्रैक के साथ सिग्नल पकड़ सकें.