बांग्लादेश के विदेश मंत्री 7 अप्रैल को आएंगे भारत, क्या दूर होंगी यूनुस की दीं कड़वाहटें? दौरे का एजेंडा जानिए

Bangladesh Foreign Minister's visit to India: बांग्लादेश में इस साल फरवरी में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहली बार होगा जब कोई कैबिनेट मंत्री दिल्ली आएगा.

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Bangladesh Foreign Minister's visit to India: बांग्लादेश के विदेश मंत्री 7 अप्रैल को आएंगे भारत
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  • बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपनी आधिकारिक भारत यात्रा पर 7 अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचेंगे
  • यह BNP सरकार की ओर से भारत का पहला उच्च स्तरीय मंत्री दौरा होगी जो द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का प्रयास है
  • खलीलुर रहमान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे
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Bangladesh Foreign Minister's visit to India: बांग्लादेश में जब से तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी सरकार बनी है, भारत के साथ उसके रिश्तों में पॉजिटिव बदलाव आए हैं. अब इसे आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है. बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 7 और 8 अप्रैल 2026 को अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद, यह बांग्लादेश की नई निर्वाचित सरकार (बीएनपी) की ओर से भारत का पहला उच्च स्तरीय मंत्री दौरा है. इस अहम दौरे से ठीक एक दिन पहले भारत के बांग्लादेश में उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की है. 

क्यों अहम है यह दौरा?

बांग्लादेश के सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि इस यात्रा को ऐसे समय में एक स्थायी राजनीतिक संबंध और दोनों देशों के लिए फायदेमंद द्विपक्षीय संबंध की नींव रखने के रूप में देखा जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया की व्यवस्था बदल रही है. खालिलुर रहमान जब दिल्ली आएंगे तो उनके साथ बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी होंगे. इस साल फरवरी में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहली बार होगा जब कोई कैबिनेट मंत्री दिल्ली आएगा.

भारत में खालिलुर रहमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे.

रहमान भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी शिष्टाचार मुलाकात करेंगे. यह ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया के युद्ध से प्रभावित पड़ोसी देशों को भारत आपातकालीन सप्लाई बढ़ा रहा है.

खालिलुर रहमान ने बांग्लादेश के अखबार डेली प्रोथम आलो से कहा, “मैं इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में जाने से पहले भारत जा रहा हूं. दिल्ली की यात्रा के दौरान मैं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिनिधियों से मिलूंगा. बातचीत का मुख्य विषय दोनों देशों के रिश्तों का भविष्य होगा. हम भारत के साथ आपसी सम्मान, गरिमा और हितों के आधार पर सामान्य संबंध चाहते हैं.”

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भारत-बांग्लादेशों के रिश्तों में अहम मोड़

साल 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में बड़ा बदलाव आया है. इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी. उस समय भारत-बांग्लादेश संबंध काफी खराब हो गए थे. दोनों देशों के बीच कई टकराव हुए, क्योंकि यूनुस ने भारत के साथ संबंधों की जगह पाकिस्तान की ओर झुकाव दिखाया और बांग्लादेश में भारत-विरोधी बयानबाजी को बढ़ावा दिया. उन्होंने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर भी भड़काऊ बयान दिए थे, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

लेकिन इसके बाद जब मौजूदा बीएनपी सरकार सत्ता में आई, तो प्रधानमंत्री तारिक रहमान की “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति के तहत दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिश शुरू हुई. इस नीति में सबसे पहले बांग्लादेश के हितों को रखा गया है.

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बांग्लादेश के सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि मौजूदा स्थिति को स्वीकार करना जरूरी है और दोनों देशों के संबंधों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के नजरिए से देखना होगा. यही संदेश खालिलुर रहमान भारत लेकर आएंगे.

इस यात्रा के दौरान एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठ सकता है, वह है फरक्का जल समझौते का नवीनीकरण.

क्या है फरक्का जल समझौता?

फरक्का जल संधि 1996 में 30 साल के लिए साइन की गई थी. भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का बैराज से पानी छोड़ने और पानी रोकने को लेकर कई बार विवाद हुआ है. यह समझौता 2026 में खत्म हो रहा है. यह समझौता सूखे मौसम (1 जनवरी से 31 मई) के दौरान फरक्का बैराज पर गंगा के पानी के बंटवारे को तय करता है.

इस साल इस समझौते को फिर से नया करने की जरूरत है और माना जा रहा है कि यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है. बांग्लादेश ने पानी के स्तर में कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण सुंदरबन पर पड़ रहे पर्यावरणीय असर को लेकर चिंता जताई है. बांग्लादेश का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह समस्याओं का समाधान नहीं कर पाया है, खासकर जब सूखे का मौसम अपने चरम पर होता है.

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