- शेख हसीना को ढाका की अदालत ने गैरहाजिरी में हत्या का आदेश देने और उकसाने का दोषी ठहराकर फांसी की सजा सुनाई है
- शेख हसीना ने अपने ऑडियो संबोधन में कहा कि बांग्लादेश में कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे
- भारत को बांग्लादेश ने हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है, लेकिन भारत ने इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की
बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि भारत द्वारा भगोड़ी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नई दिल्ली में सार्वजनिक भाषण देने की अनुमति देने पर उसे आश्चर्य और स्तब्धता हुई है. 78 वर्षीय हसीना अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद पड़ोसी देश भारत भाग गई थीं, जिसने उनके 15 वर्षीय निरंकुश शासन का अंत कर दिया था. उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली के एक भरे हुए प्रेस क्लब में ऑडियो संबोधन के माध्यम से अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया.
शेख हसीना को नवंबर में ढाका की एक अदालत ने उनकी अनुपस्थिति में उकसाने, हत्या का आदेश जारी करने और अत्याचारों को रोकने में निष्क्रियता का दोषी पाया था और फांसी की सजा सुनाई थी.
यूनुस सरकार ने क्या कहा
ढाका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "बांग्लादेश सरकार और जनता हैरान और स्तब्ध हैं. भारतीय राजधानी में इस कार्यक्रम की अनुमति देना और नरसंहार करने वाली हसीना को खुलेआम नफरत फैलाने वाला भाषण देने देना... बांग्लादेश की जनता और सरकार का स्पष्ट अपमान है." मंत्रालय ने कहा कि हसीना को भाषण देने की अनुमति देना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है जो द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है. हसीना की निरंकुश सरकार के तख्तापलट के बाद से चले आ रहे उथल-पुथल भरे दौर के बाद बांग्लादेश में मतदाता 12 फरवरी को नए नेताओं को चुनने के लिए मतदान करेंगे.
क्या कहा था शेख हसीना ने
अपने ऑडियो संबोधन में हसीना ने कहा था कि अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे. ऑनलाइन प्रसारित इस संबोधन को 100,000 से अधिक लोगों ने देखा. बांग्लादेश ने भारत से हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी तक इस अनुरोध पर कोई टिप्पणी नहीं की है. हसीना को भारत द्वारा दिए गए समर्थन ने उनके तख्तापलट के बाद से दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है.













