बैंकॉक भूकंप में जमींदोज चीनी फर्म से जुड़ी इमारत, नीचे दबे हैं लोग; ब्लूप्रिंट जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स निकालते हुए 4 चीनी लिए गए हिरासत में

यह इमारत, जिसकी लागत दो अरब baht (लगभग 45 मिलियन पाउंड) से ज्यादा थी, तीन साल से बन रही थी. एक चीनी समर्थित फर्म इसके निर्माण में शामिल थी, और अब इसके ढहने की वजह से उसकी संरचनात्मक पर सवाल उठ रहे हैं. बैंकॉक में सैकड़ों ऊंची इमारतें निर्माणाधीन हैं, लेकिन यह अकेली क्यों ढही? एक्सपर्ट और अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं. क्या यह सिर्फ भूकंप का असर था, या निर्माण में कोई खामी थी? और ये दस्तावेज़ क्या छिपा रहे थे, जो इतने जरूरी थे कि आपदा क्षेत्र में घुसकर इन्हें निकालने की कोशिश की गई?

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बैंकॉक भूकंप में बड़ी तबाही
बैंकॉक:

31 मार्च 2025 की सुबह, बैंकॉक की हवा में अभी भी धूल और दहशत की गूंज थी. पिछले शुक्रवार को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में खौफ का मातम पसरा हुआ है. चटुचक जिले में एक 30 मंजिला निर्माणाधीन इमारत, जो थाईलैंड के स्टेट ऑडिट ऑफिस (SAO) की नई इमारत बनने वाली थी, चंद सेकंड में ढह गई. धूल का गुबार उठा, और मलबे के नीचे दर्जनों मजदूर दब गए. रविवार तक, 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, 32 घायल थे, और 76 अभी भी लापता थे. रेस्क्यू टीम मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजने में जुटी है. जब चारों ओर लोग तबाही का मंजर देख रहे हैं, तब लोग चार चीनी लोग इस बिल्डिंग से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट्स को अवैध ढंग से हासिल करते हुए हिरासत में लिए गए.

इस त्रासदी के बीच एक नया मोड़ तब आया जब रविवार को थाई पुलिस ने चार चीनी नागरिकों को हिरासत में लिया. ये लोग ढह गई इमारत के प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति के अंदर दाखिल हुए थे. पुलिस मेजर जनरल नोपासिन पूलस्वात, मेट्रोपॉलिटन पुलिस ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इन लोगों ने इमारत से 32 फाइलें निकालने की कोशिश की थी. बैंकॉक के गवर्नर ने पहले ही इस इलाके को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया था, जहां बिना इजाज़त दाखिल होने की मनाही थी. फिर सवाल ये उठा कि आखिर ये लोग वहां क्या कर रहे थे?

जांच का पहला कदम

पुलिस को शनिवार को इस बारे में सूचना मिली कि कुछ लोग मलबे से दस्तावेज़ निकाल रहे हैं. तब इस मामले की तफ्तीश शुरू हुई, और एक चीनी व्यक्ति को घटनास्थल के पास पकड़ा गया. उसने दावा किया कि वह एक निर्माण परियोजना का प्रोजेक्ट मैनेजर है. इस जांच में पता चला कि उसका वर्क परमिट वैलिड था और वह इटैलियन-थाई डेवलपमेंट पब्लिक कंपनी लिमिटेड के साथ एक ज्वाइंट वेंचर के लिए काम करता था, जो इस इमारत का ठेकेदार था. इसके बाद पुलिस ने तीन अन्य लोगों को भी ढूंढ निकाला और उनके पास से 32 डॉक्यूमेंट्स ज़ब्त किए.

दस्तावेज़ों का रहस्य

इन चारों ने पुलिस को बताया कि वे एक सब-कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम करते थे और दस्तावेज़ों को इंश्योरेंस क्लेम के लिए निकालने आए थे. ये कागजात एक कंटेनर में रखे थे, जो कंपनी का अस्थायी ऑफिस था. पूछताछ के बाद उन्हें अस्थायी तौर पर रिहा कर दिया गया. लेकिन रविवार को चटुचक जिला कार्यालय ने 5 चीनी नागरिकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जिसमें इन चारों के साथ उनके एम्पायलर को भी शामिल किया गया. आरोप था कि उन्होंने सार्वजनिक घोषणा का उल्लंघन कर ब्लूप्रिंट और अन्य दस्तावेज़ निकाले. अब पुलिस इन चारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी, जबकि पांचवें व्यक्ति की जांच जारी है.

सवालों का जाल

यह इमारत, जिसकी लागत दो अरब baht (लगभग 45 मिलियन पाउंड) से ज्यादा थी, तीन साल से बन रही थी. एक चीनी समर्थित फर्म इसके निर्माण में शामिल थी, और अब इसके ढहने की वजह से उसकी संरचनात्मक पर सवाल उठ रहे हैं. बैंकॉक में सैकड़ों ऊंची इमारतें निर्माणाधीन हैं, लेकिन यह अकेली क्यों ढही? एक्सपर्ट और अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं. क्या यह सिर्फ भूकंप का असर था, या निर्माण में कोई खामी थी? और ये दस्तावेज़ क्या छिपा रहे थे, जो इतने जरूरी थे कि आपदा क्षेत्र में घुसकर इन्हें निकालने की कोशिश की गई?

उम्मीद और अनिश्चितता

जैसे-जैसे बचाव कार्य जारी है, परिवार मलबे के पास इंतज़ार कर रहे हैं. हर गुजरता पल उम्मीद को कमज़ोर करता है, लेकिन सवाल बढ़ाता है. यह त्रासदी सिर्फ एक इमारत के ढहने की कहानी नहीं है, यह जवाबदेही, रहस्य और इंसानी जिंदगियों की कीमत की कहानी है. क्या सच सामने आएगा, या यह मलबे के नीचे दफन होकर रह जाएगा? समय ही बताएगा.

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