Orion spacecraft का स्प्लैशडाउन सफलतापूर्वक लैंड हो गया है. यह ऐतिहासिक वापसी Pacific Ocean में San Diego के तट के पास हुई.
कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के बाद पैराशूट सिस्टम के जरिए समुद्र में सुरक्षित उतरा. इसके बाद रिकवरी टीम तुरंत मौके पर पहुंच रही है, अब अंतरिक्ष यात्रियों को बाहर निकाला जाएगा और उन्हें शिप पर ले जाया जाएगा.
क्यों सबसे खतरनाक होता है स्प्लैशडाउन?
मिशन का यह अंतिम चरण सबसे जोखिम भरा माना जाता है. जैसे ही ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे करीब 2760°C तक की भीषण गर्मी झेलनी पड़ती है. इतनी अधिक तापमान पर कैप्सूल का हीट शील्ड ही अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
इसके अलावा, हाई-स्पीड री-एंट्री, सही एंगल बनाए रखना, और पैराशूट का समय पर खुलना. ये सभी फैक्टर इस चरण को तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील बनाते हैं. यह स्प्लैशडाउन न सिर्फ मिशन का समापन है, बल्कि टेक्नोलॉजी और सटीकता की सबसे बड़ी परीक्षा भी है.
यहां देखें LIVE लैंडिंग
कुछ ही देर में अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित बाहर निकाले जाएंगे
Mission Moon: सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित, रिकवरी टीमें मौके पर पहुंचीं
अंतरिक्ष से धरती का सफर पूरा
कैप्सूल की रिकवरी के लिए यूएसएस जॉन पी. मर्था युद्धपोत, सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर पहले से तैनात थे. इससे पहले चंद्र मिशन से लौटे अंतरिक्षयात्रियों की ऐसी रिकवरी 1972 में अपोलो‑17 के समय हुई थी.
आर्टेमिस‑II ने पृथ्वी की ओर वापसी के दौरान लगभग 24,661 मील प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की और फिर पैराशूट खुलने के बाद मात्र 19 मील प्रति घंटे की गति से सुरक्षित स्प्लैशडाउन किया.
6 मिनट के लिए टूटा कम्युनिकेशन
री‑एंट्री के दौरान जब कैप्सूल लाल‑गर्म प्लाज़्मा से घिर गया, तो करीब छह मिनट का प्लान्ड कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हुआ. इस दौरान मिशन कंट्रोल में तनाव चरम पर था, क्योंकि इसी चरण में यान की हीट शील्ड को हज़ारों डिग्री तापमान सहना पड़ा.
2022 में बिना चालक दल के हुए पिछले परीक्षण उड़ान के बाद ऑरियन की हीट शील्ड बुरी तरह झुलसी हुई लौटी थी. इस बार सिस्टम ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया. लीड फ़्लाइट डायरेक्टर जेफ़ रैडिगन ने कहा, 'ब्लैकआउट के दौरान थोड़ा डर महसूस होना मानवीय स्वभाव है.'
यह मिशन क्यों है ऐतिहासिक
यह वापसी उस ऐतिहासिक मिशन का समापन है, जिसके दौरान अंतरिक्षयात्रियों ने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से (फार साइड) के ऐसे दृश्य देखे, जिन्हें अब तक किसी मानव ने नहीं देखा था. इसी दौरान अंतरिक्ष में रहते हुए उन्होंने एक पूर्ण सूर्यग्रहण भी देखा.
पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के समय स्पेसक्राफ्ट की गति मैक‑33 थी, यानी ध्वनि की गति से 33 गुना तेज. ऐसी रफ्तारें आखिरी बार 1960 और 1970 के दशक के अपोलो मिशनों के दौरान देखी गई थीं. यह पूरा री‑एंट्री चरण ऑटोमैटिक पायलट पर किया गया.
NASA Moon Mission: यान पर कौन-कौन था सवार
नासा के आर्टेमिस‑II मिशन पर गए चार अंतरिक्षयात्रियों ने शुक्रवार को प्रशांत महासागर में शानदार स्प्लैशडाउन के साथ पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी की. इसके साथ ही मानवता की पिछले आधे शतक में पहली चंद्र यात्रा सफलतापूर्वक पूरी हुई.
कमांडर रीड वायजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसन को लेकर ऑरियन क्रू कैप्सूल ‘इंटीग्रिटी’ ने सैन डिएगो तट के पास समुद्र में सफल लैंडिंग की.
NASA को मिली बड़ी सफलता, चांद की यात्रा कर लौटे अंतरिक्षयात्री
नासा के चार अंतरिक्षयात्रियों को लेकर लौट रहा ऑरियन क्रू कैप्सूल ‘इंटीग्रिटी’ सफलतापूर्वक सुबह 5:37 बजे (IST) प्रशांत महासागर में, सैन डिएगो तट के पास, सुरक्षित स्प्लैशडाउन कर गया.
यह मिशन कुल 9 दिनों तक चला, जिसके दौरान अंतरिक्षयान ने चंद्रमा के बेहद करीब से उड़ान भरी. नासा के अनुसार, 1972 के बाद पहली बार चंद्रमा के इतने निकट मानव उड़ान का अनुभव किया गया, जिसे मिशन टीम ने “Moon Joy” करार दिया है.
नासा ने इस मिशन को “टेक्स्टबुक री-एंट्री और परफेक्ट टचडाउन” बताते हुए इसे मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए एक बड़ी तकनीकी और भावनात्मक उपलब्धि बताया.
इस बीच, भारत ने भी मानव अंतरिक्ष मिशन को लेकर अपने इरादे दोहराए हैं. भारत 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने की दिशा में काम कर रहा है.
Artemis 2 Splash Down: बस थोड़ी देर में लैंडिंग
चार अंतरिक्षयात्रियों को लेकर लौट रहा ओरियन क्रू कैप्सूल तय समय पर सुबह 5:37 बजे पृथ्वी पर उतरेगा. स्पेसक्राफ्ट को री-एंट्री के लिए निर्धारित सटीक एंगल पर सेट कर दिया गया है. लैंडिंग प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में होगी, जहां रिकवरी टीम पहले से तैनात है. मिशन कंट्रोल का कहना है कि सभी सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कैप्सूल की सुरक्षित लैंडिंग की पूरी तैयारी है.














