- अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में युद्धविराम के लिए अलग-अलग कमरों में बैठकर बातचीत कर रहे हैं
- ईरान ने बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित संपत्तियों की रिहाई जैसी सशर्त मांगें रखीं हैं
- अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को हर हाल में खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत में शामिल होने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में हैं. इस वार्ता के लिए कई इंतजाम किए गए हैं, जिसमें आमने-सामने बातचीत और अलग-अलग कमरों में बातचीत, दोनों शामिल हैं. हालांकि दोनों देशों के बीच कोई फॉर्मेट अभी भी तय नहीं है. दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास, परस्पर विरोधी मांगों और संघर्ष से बाहर निकलने के बढ़ते दबाव के बीच यह वार्ता होने जा रही है. दोनों पक्षों के बीच 'युद्ध से निकलने का रास्ता खोजने की जरूरत' के अलावा ज्यादा कुछ कॉमन नहीं लगता.
सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान ने दोनों स्थितियों के लिए तैयारी कर ली है. इस्लामाबाद या तो दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत कराने के लिए तैयार है या उनके डेलीगेशन के लिए अलग-अलग जगहों का इंतजाम करके उनके बीच संदेश पहुंचाने के लिए तैयार है.
बातचीत का फॉर्मेट तय नहीं, अलग-अलग कमरों में बैठने की उम्मीद
अल जजीरा के अनुसार, अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के इस्लामाबाद में एक ही होटल में रुकने की उम्मीद है, लेकिन वे आमने-सामने बातचीत नहीं करेंगे. इसके बजाय, उम्मीद है कि वे अलग-अलग कमरों में रहेंगे, जबकि पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच मैसेज पहुंचाएंगे.
अमेरिका की किसी भी कीमत पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने की धमकी
होर्मुज संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि स्ट्रेट को किसी भी कीमत पर खोला जाएगा, भले ही इसके लिए ईरान साथ हो या नहीं. दूसरी तरफ तस्त्रीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 71 सदस्यीय ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व कर रहे संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने इस्लामाबाद पहुंचने पर सावधानी भरा रुख अपनाया और कहा कि ईरान अच्छे इरादों के साथ, लेकिन भरोसे के बिना बातचीत में शामिल हो रहा है.
ईरान ने रखीं पक्की शर्तें
ईरान ने पक्की शर्तें रखी हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित और ब्लॉक किए गए एसेट्स को रिलीज करने जैसे मुद्दों को सुलझाना होगा.
अमेरिकी डेलिगेशन को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लीड कर रहे हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने मीडिया से कहा, "मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगा. अगर ईरान अच्छी नीयत से बातचीत करता है तो हम निश्चित रूप से खुले हाथ बढ़ाने को तैयार हैं."
पाक पीएम ने बातचीत को बताया 'करो या मरो' वाला पल
इधर पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत को 'करो या मरो' वाला पल बताया. यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब बड़े पैमाने पर इलाके के हालात अस्थिर बने हुए हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वैसे तो तकनीकी सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी है, इससे डिप्लोमैटिक कोशिशें मुश्किल हो रही हैं.
ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने पर तुला
होर्मुज संकट का असर वैश्विक बाजार पर देखने को मिला है. इसकी वजह से तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है. अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना चाहता है, जबकि ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखने पर तुला हुआ है.
बातचीत की स्थिति अभी भी बहुत अलग है. द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाने की अमेरिका की मांगों को खारिज कर दिया है. वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि बैन में राहत डील के बाद ही मिलेगी.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ की परीक्षा
यह अभी साफ नहीं है कि बातचीत डायरेक्ट होगी या मध्यस्थता होगी. द वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया, दोनों पक्ष अलग-अलग बैठ सकते हैं. वेंस के ऊपर इस वक्त एक बड़ी जिम्मेदारी है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने उन्हें बातचीत को लीड करने के लिए भेजा है. ऐसे में इस बातचीत का नतीजा उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ से काफी हद तक जुड़ा हुआ है.
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सुरक्षा को लेकर इस्लामाबाद में रेड अलर्ट
पाकिस्तान के सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से पहले के सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं. पाकिस्तानी मीडिया डॉन के अनुसार, अमेरिका-ईरान की वार्ता से पहले फेडरल कैपिटल ‘रेड अलर्ट' पर थी. दोनों देशों के डेलिगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा वाले तैनात किए गए.
एक दिन पहले डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मल्टी-टियर सिक्योरिटी अरेंजमेंट की देखरेख मिलिट्री करेगी. इसमें रेंजर्स जैसी पैरामिलिट्री फोर्स और इस्लामाबाद और पंजाब पुलिस मदद करेगी. इस्लामाबाद ट्रैफिक पुलिस और नेशनल हाईवे और मोटरवेज पुलिस को सड़कों पर तैनाती है.
कैपिटल पुलिस के करीब 6,000 लोग, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के 900 लोग, और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी के 3,000 लोग, रेंजर्स और पाकिस्तान आर्मी के सैनिकों के साथ ड्यूटी करेंगे. करीब 1,000 ट्रैफिक पुलिस अधिकारी भी तैनात किए जा रहे हैं. सेना और रेंजर्स रेड जोन और उच्च स्तरीय सुरक्षा जोन की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. क्विक रिस्पॉन्स फोर्स की टुकड़ियां भी अलग-अलग जगहों पर तैनाती है.
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अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर
वहीं अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया भर की नजर टिकी हुई है. यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे. कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी.
अमेरिका-ईरान वार्ता का संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत
दुजारिक ने कहा, "महासचिव इस बात को दोहराते हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का कोई अन्य व्यवहार्य विकल्प नहीं है और यह समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है, के पूर्ण अनुपालन में होना चाहिए. मध्य पूर्व संघर्ष और उसके परिणामों के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के विशेष दूत, जीन अर्नाल्ट, कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने के लिए अभी भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं."
इजरायल के लेबनान पर हमले जारी
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बुधवार तड़के एक अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) पर सहमति बनी थी. इसके बावजूद इजरायल ने लेबनान पर अपने हमले जारी रखे हैं. इजरायल लेबनान में ईरान समर्थित उग्रवादी समूह हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले कर रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ का कहना है कि लेबनान पर हमलों को रोकना इस संघर्ष विराम का एक अहम हिस्सा है.
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