US-Iran Peace Talk Live Updates: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को ईरान और अमेरिका के बीच अहम बातचीत होने वाली है. इसी बातचीत से तय होगा कि ईरान और अमेरिका में लड़ाई खत्म होगी या नहीं. लेबनान पर इजरायली हमले के कारण ईरान ने पहले इस बातचीत में आने से मना कर दिया था. हालांकि, बाद में ईरान बातचीत के लिए मान गया. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के नेता पहुंच चुके हैं.
इस पीस टॉक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही फिर से खुल जाएगा, चाहे इसमें ईरान का सहयोग मिले या न मिले. इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई शांति समझौता नहीं होता है तो अमेरिका फिर से हमला करेगा. इस्लामाबाद से हमारे एनडीटीवी के रिपोर्टर मोहम्मद नदीम शांति वार्ता से जुड़ी-जुड़ी पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे....
पीस टॉक से जुड़ी बड़ी बातेंः
- पाकिस्तान की ओर से कौन: पाकिस्तान इस वार्ता का मेजबान और मध्यस्थ दोनों है. पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इसहाक डार, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक करेंगे.
- अमेरिका की ओर से कौन: व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल होंगे.
- ईरान की ओर से कौन: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रावंची और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाकिर जोलगादर शामिल होंगे.
- कितने बजे से शुरू होगी बात: अमेरिका-ईरान में सुबह 9 बजे के आसपास बातचीत शुरू होने की उम्मीद है. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ठहरेंगे. यहीं बातचीत भी होगी.
- क्या आमने-सामने होगी बातचीत: एक ही होटल की छत के नीचे रहेंगे, लेकिन अधिकारियों के अनुसार दोनों टीमें आमने-सामने बैठकर बातचीत नहीं करेंगी. इसके बजाय, दोनों पक्षों को अलग-अलग कमरों में बैठाया जाएगा और पाकिस्तानी अधिकारी एक कमरे से दूसरे कमरे तक संदेश पहुंचाने का काम करेंगे. कूटनीतिक भाषा में इस प्रकार की अप्रत्यक्ष बातचीत को 'प्रॉक्सिमिटी टॉक्स' कहा जाता है.
- बातचीत के मुद्दे क्या रहेंगे: इस बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान में सीजफायर और होर्मुज स्ट्रेट का रहेगा. ईरान चाहता है कि सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया जाए. इसके साथ ही ईरान को आगे कभी फिर हमला न करने की गारंटी भी चाहिए.
9-10 बजे तक पहुंचेंगे जेडी वेंस
ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 9 या 10 बजे तक इस्लामाबाद पहुंच जाएंगे. पहले खबर आई थी कि वेंस दोपहर तक पहुंचेंगे.
वार्ता से पहले शहबाज शरीफ से मिलेगा ईरानी डेलिगेशन
दोपहर तक पहुंचेंगे जेडी वेंस
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता होनी है. इसके लिए ईरानी डेलिगेशन शनिवार सुबह इस्लामाबाद पहुंच चुका है. वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दोपहर तक पहुंचने की उम्मीद है.
ईरान के डेलिगेशन में कौन-कौन?
इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करने वाले ईरानी डेलिगेशन में 80 से ज्यादा लोग हैं. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ इसके प्रमुख हैं.
शहबाज बोले- वार्ता को सफल बनाने की कोशिश करेंगे
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान में बातचीत से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि वह इस वार्ता को सफल बनाने की कोशिश करेंगे.
ईरान ने शेयर किया भावुक वीडियो
इस बातचीत से पहले ईरान ने एक भावुक वीडियो शेयर किया है. यह वीडियो उस विमान का है, जिसमें ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है. इस वीडियो में विमान की सीट पर स्कूल के बैग रखे हैं और बच्चों की तस्वीरें लगी हैं. यह उन बच्चों की तस्वीरें हैं जो इस जंग में मारे गए हैं.
ईरानी संसद के स्पीकर ने क्या कहा?
अमेरिका के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने कहा कि उन्हें उम्मीद तो है लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि 'हमारी नीयत अच्छी है लेकिन हमें भरोसा नहीं है.' उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका एक असली समझौते के लिए तैयार है तो ईरान भी तैयार हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि 'दुर्भाग्य से अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव हमेशा नाकामी और वादा तोड़ने पर ही खत्म हुआ है.'
बातचीत से पहले तनाव
इस्लामबाद में बातचीत से पहले तनाव भी साफ देखा जा रहा है. लेबनान पर इजरायली हमले लगातार जारी हैं. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने कहा था कि अमेरिका के साथ बातचीत तब तक आगे नहीं बढ़ सकती, जब तक सीजफायर में लेबनान तक नहीं बढ़ जाता.
वहीं, ईरानी सेना की जॉइंट कमांड ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका और इजरायल की ओर से बार-बार 'भरोसा तोड़ने' के कारण उसकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं.













