G-20 बैठक में यूक्रेन को लेकर संयुक्त घोषणापत्र का अभाव देशों के बीच विभाजन का संकेत : UN

मेजबान भारत की ओर से मतभेदों को कम करने की कोशिशों के बाजवूद यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस और पश्चिम के बीच गहरी खाई दिखी जिसके कारण संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनाने के लिहाज से यह बैठक नाकाम रही.

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  • दिल्ली में गुरुवार को हुई थी जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक
  • मीटिंग में यूक्रेन संघर्ष को लेकर हुई चर्चा
  • मीटिंग में संयुक्त घोषणापत्र पर भी लेकर हुई बातचीत
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वॉशिंगटन:

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने कहा है कि जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में यूक्रेन को लेकर संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बनना अंतरराष्ट्रीय मंच पर देशों के बीच ‘विभाजन' को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह एक मेजबान के रूप में भारत के प्रयासों का परिचायक नहीं है. जी-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत ने विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित की थी, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीनी विदेश मंत्री क्विन गांग समेत अन्य देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया.

मेजबान भारत की ओर से मतभेदों को कम करने की कोशिशों के बाजवूद यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस और पश्चिम के बीच गहरी खाई दिखी जिसके कारण संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनाने के लिहाज से यह बैठक नाकाम रही. नई दिल्ली में एक प्रेसवार्ता के दौरान ब्लिंकन ने कहा कि रूस और चीन दो देश थे, जिन्होंने बैठक के दौरान संयुक्त घोषणापत्र का समर्थन नहीं किया.

गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने प्रेसवार्ता में गुरुवार को कहा, ‘‘हम बैठक में एक पक्षकार नहीं थे. मुझे लगता है कि स्वाभाविक रूप से यह किसी भी तरह से जी-20 के मेजबान के रूप में भारत के प्रयासों को प्रदर्शित नहीं करता. चूंकि हम मेज पर नहीं थे, इसलिए हमारे लिए यह उचित नहीं है कि इस बात के लिए दोष मढ़ें या विश्लेषण करें कि मुद्दे को कहां होना चाहिए था. लेकिन यह एक और विभाजन का प्रदर्शन है जिसे हम कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देखते हैं.''

यूक्रेन पर एक साल पहले रूस के हमले के बाद पहली बार ब्लिंकन और लावरोव ने जी-20 बैठक से इतर एक दूसरे आमने-सामने की बातचीत की.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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