- ईरान का दूसरा युद्धपोत श्रीलंका के करीब पहुंच गया है और उसने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति मांगी है
- ईराना का एक युद्धपोत IRIS डेना अमेरिका के टॉरपीडो हमले में डूब गया था, जिसमें 87 ईरानी मारे गए थे
- ईरान ने अमेरिका-इजरायल पर जवाबी हमले की चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी
अमेरिका के टॉरपीडो अटैक में ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने के महज एक दिन बाद ही ईरान का दूसरा युद्धपोत श्रीलंका की समुद्री सीमा के करीब पहुंच गया और उसने बंदरगाह पर रुकने की इजाजत मांगी है. श्रीलंकाई मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने जहाज के क्षेत्रीय जल सीमा के ठीक बाहर मौजूद होने की पुष्टि की है. अधिकारियों का कहना कि इस जहाज पर 100 से ज्यादा लोग सवार हैं. पिछले विमान की तरह इसे भी निशाना बनाए जाने का खतरा मंडरा रहा है.
एक दिन पहले ही तबाह किया ईरानी युद्धपोत
याद दिला दें कि इजरायल-ईरान युद्ध के बीच भारत के साथ युद्धाभ्यास करके लौट रहे ईरानी फ्रिगेट IRIS डेना को अमेरिका ने पनडुब्बी के जरिए टॉरपीडो से निशाना बनाया था. इस हमले में जहाज पर सवार 87 ईरानियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. 32 ईरानी को समुद्र से बचाकर निकाल लिया गया था, जिनका गाले के अस्पताल में कड़ी सुरक्षा में इलाज चल रहा है. करीब 60 नाविक अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश हो रही है.
श्रीलंका ने ईरानी युद्धपोत को लेकर क्या कहा?
श्रीलंका के दक्षिण तट पर जिस तरह ईरानी फ्रिगेट को मार गिराया गया था, वैसी ही आशंका ईरान के दूसरे जहाज को लेकर भी जताई जा रही है. इस युद्धपोत ने श्रीलंका से अर्जेंट पोर्ट कॉल (बंदरगाह पर रुकने) की अनुमति मांगी है. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस मुद्दे पर सरकार और सेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है.
श्रीलंका के विपक्षी सांसद नमल राजपक्षे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट बयान में अपनी सरकार से इस युद्धपोत को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. मंत्री जयतिस्सा ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है और इसके लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है.
देखें- सबमरीन से हमला इतनी बड़ी बात क्यों-कैसे ये युद्ध का टर्निंग प्वाइंट बन सकता है
ईरान की धमकी, भारी कीमत चुकानी होगी
ईरान ने अपने युद्धपोत पर हमले के जवाब में अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं. ईरानी लीडरशिप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई इस "क्रूरता" के लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी.
टॉरपीडो अटैक से हिंद महासागर में चिंता बढ़ी
ईरानी जहाज को उस समय निशाना बनाया गया, जब वह विशाखापत्तनम में सैन्य अभ्यास से लौट रहा था. भारत और श्रीलंका दोनों ने ही अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध में अब तक तटस्थ रहने की कोशिश की है. भारत ने बातचीत से समाधान पर जोर दिया है, लेकिन हिंद महासागर में इस हमले ने चिंताएं बढ़ा दी हैं.













