स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में अभी भी फंसे हैं 16 भारतीय कार्गो जहाज़, 'सेफ पैसेज' के लिए ईरान से बातचीत तेज़: सूत्र 

सूत्रों के मुताबिक, भारत स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से मालवाहक जहाजों के गुजरने पर किसी भी प्रकार का शुल्क (Toll) लगाने के सख्त खिलाफ है. विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि मालवाहक जहाजों पर शुल्क लगाने का विचार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हैं कई जहाज
NDTV
नई दिल्ली:

ईरान और अमेरिका के बीच भले ही सीजफायर हो गया है लेकिन इसके बावजूद भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं. बताया जा रहा है कि अभी भी यहां पर कई देशों के जहाज फंसे हैं, जिसे ईरान बगैर अनुमति जाने नहीं दे रहा है. इन जहाजों में भारत के भी कई जहाज हैं जो अभी भी होर्मुज में मौजूद हैं. इन जहाजों में 5 कच्चे तेल के टैंकरों, 1 एलपीजी टैंकर सहित 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं.सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में फंसे 16 भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान के साथ उच्चतम स्तर पर कोशिशें तेज़ कर दी हैं. 

किसी प्रकार के शुल्क के खिलाफ है भारत

सूत्रों के मुताबिक, भारत स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से मालवाहक जहाजों के गुजरने पर किसी भी प्रकार का शुल्क (Toll) लगाने के सख्त खिलाफ है. विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि मालवाहक जहाजों पर शुल्क लगाने का विचार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (International Maritime Laws) के खिलाफ है. ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर शुल्क (Toll) लगाने की अनुमति देने के लिए संबंधित संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा. भारत ने अभी तक शुल्क के मुद्दे पर ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं की है.

भारत ने पहले ही जारी किया था बयान

सूत्रों का कहना है कि भारत ईरान से काफी कम कच्चा तेल खरीद रहा है. कई मुद्राओं के तहत ईरानी तेल खरीदा जा सकता है. भारत ने प्रतिस्पर्धी दरों पर जहां भी तेल उपलब्ध हो, वहां से तेल खरीदने का निर्णय लिया है.पिछले शनिवार को एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि मध्य पूर्व एशिया में युद्ध की वजह से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान के बीच भारतीय रिफाइनर्स ने ईरान समेत कई स्रोतों से अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सिक्योर कर लिया है, और ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान को लेकर कोई अड़चन नहीं है.

भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है

पेट्रोलएम मंत्रालय ने ये भी साफ़ किया था कि "भुगतान मुद्दों" (“payment issues”) के कारण ईरानी कच्चे तेल को लेकर वाडिनार, भारत आ रहे ऑयल टैंकर के चीन ले जाने की खबर तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास व्यावसायिक आधार पर विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल खरीदने की पूरी छूट है.पिछले शुक्रवार को  ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा ऑयल टैंकर "PING SHUN" ने अपना रुट बदल लिया था. शिप ट्रैकिंग साइट marinetraffic.com के मुताबिक ऑयल टैंकर "PING SHUN" अब कोलोंबो पोर्ट की ओर बढ़ रहा है. इससे पहले ऑयल टैंकर "पिंग शुन" ("PING SHUN") के 04 अप्रैल की सुबह 11 बजे वाडिनार पोर्ट पहुँचने की उम्मीद थी. ये ऑयल टैंकर इस्वातिनी (ESWATINI) के झंडे के नीचे चल रहा है. इसपर करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया हुआ है.

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