दुनिया डिजिटल हो चुकी है. हर चीज़ एक क्लिक पर उपलब्ध है. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी देश का सबसे ताकतवर शख्स दो महीने तक पूरी दुनिया की नज़रों से गायब रहे और किसी को उसकी लोकेशन तक पता न हो.
हम बात कर रहे हैं ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई की. जिन्हें सत्ता संभाले दो महीने हो चुके हैं, लेकिन न तो उन्हें सार्वजनिक तौर पर देखा गया है, न ही उनकी आवाज़ किसी ने सुनी है. सिर्फ लिखित संदेश, कभी ईरानी टीवी के जरिए, कभी टेलीग्राम पोस्ट के माध्यम से सामने आते हैं.
इस रिपोर्ट में जानिए
• मुजतबा खामनेई कहां छिपे हैं.
• उनका सीक्रेट ठिकाना कितना अभेद्य है.
• ईरानी कमांडर उनसे कैसे संपर्क करते हैं.
• क्यों उनके ठिकाने पर मोबाइल और कंप्यूटर पूरी तरह बैन हैं.
• क्या वाकई वो एक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे.
• हाथ से लिखे कागज, सीक्रेट कोरियर और डिजिटल ब्लैकआउट के जरिए कैसे चलता है ईरान का शासन.
दावा है कि अमेरिकी और इस्राइली खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए ईरान ने सदियों पुरानी संचार प्रणाली को फिर से ज़िंदा कर दिया है. साइकिल और मोटरसाइकिल पर दौड़ते कोरियर, सील बंद लिफाफे और बेहद सीमित लोगों को मिलने की अनुमति.
यह सिर्फ एक सुरक्षा इंतज़ाम नहीं, बल्कि सत्ता की वह परत है जिसे भेद पाना सुपरपॉवर्स के लिए भी आसान नहीं है.
इस वीडियो में जानिए
• ऑपरेशन मुजतबा का पूरा रहस्य.
• क्या ईरानी जनरल ही असल में फैसले ले रहे हैं.
• क्यों पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को भी मुजतबा से मिलने नहीं दिया गया.
• मुजतबा खामनेई की सेहत को लेकर उठते सबसे बड़े सवाल.
क्या यह सिर्फ सुरक्षा का मामला है या सत्ता के उत्तराधिकार की रणनीति.
सवाल बहुत हैं, जवाब फिलहाल उन्हीं कागज़ों में बंद हैं जो अंधेरी गलियों से होकर आगे बढ़ रहे हैं.
पूरा सच जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें.