होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी अब सीधे होर्मुज में टकराव की स्थिति तक पहुंच गई है. एक ओर अमेरिका ने होर्मुज से आने‑जाने वाले समुद्री रास्तों पर सख्त नाकेबंदी कर रखी है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अपने तटीय इलाकों और समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की इस नाकेबंदी का असर साफ़ तौर पर दिखने लगा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से सामने आया है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकरों को होर्मुज से वापस लौटा दिया है. इसके अलावा 6 मालवाहक जहाजों को भी रास्ते से पलटा गया है.
यूएस सेंट्रल कमांड का दावा है कि ईरान के बंदरगाहों की ओर आने‑जाने वाले सभी जहाजों को रोका जा रहा है. फारस की खाड़ी और ओमान सागर में स्थित ईरान के प्रमुख बंदरगाह अमेरिकी निगरानी में हैं. ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास, जहां से तेल, स्टील, खाद और अनाज का बड़ा व्यापार होता है, नाकेबंदी के असर में आ चुका है.
नाकेबंदी के चलते ईरान के पोर्ट्स से जुड़ी समुद्री आवाजाही लगभग ठप हो गई है. कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है और कुछ जहाज खुद ही वापस लौट गए हैं. गैर‑ईरानी बंदरगाहों से आने‑जाने वाले जहाजों को फिलहाल रोका नहीं गया है.
इस बीच अमेरिका ने होर्मुज और ईरान के आसपास अपनी सैन्य तैनाती और मजबूत कर दी है. फारस की खाड़ी में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर, 20 से ज्यादा युद्धपोत, हजारों नौसेना कमांडो और करीब 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं. फाइटर जेट्स भी हाई अलर्ट पर बताए जा रहे हैं.
अमेरिका की नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. ईरान का बयान है कि विरोधी देशों के जहाज होर्मुज से नहीं निकल पाएंगे. फारस की खाड़ी और ओमान के तटों पर ईरान ने अपनी समुद्री निगरानी और चौकसी बढ़ा दी है.
होर्मुज में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. दुनिया की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी है कि यह तनाव आगे किस दिशा में जाता है.