Twisha Sharma death case: ट्वीशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है और अब यह केस कानूनी, पारिवारिक और संवेदनशील पहलुओं के बीच फंस गया है. मौत के 7 दिन बाद भी त्रिशा का शव भोपाल के एम्स की मोर्चरी में रखा हुआ है क्योंकि परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है.
दरअसल, 11 मई को ट्वीशा का शव फंदे से लटका हुआ मिला था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी बताई गई है, लेकिन शरीर पर कई चोटों के निशान मिलने के बाद परिवार ने हत्या की आशंका जताई है. यही वजह है कि परिवार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहा है, जिसे वह दिल्ली एम्स में कराना चाहता है.
इस बीच पुलिस आज अदालत का रुख कर सकती है और अंतिम संस्कार की अनुमति देने की अपील कर सकती है. प्रशासन का कहना है कि शव को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि तकनीकी कारणों से मोर्चरी में पर्याप्त तापमान बनाए रखना संभव नहीं है और बॉडी डिकंपोज होने लगी है.
ट्वीशा के परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ महीनों बाद से ही उसे ससुराल में प्रताड़ित किया जा रहा था. त्रिशा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थी और भोपाल में उसकी शादी करीब 5 महीने पहले समर्थ सिंह से हुई थी. परिवार के मुताबिक, शादी के बाद से ही वह मानसिक दबाव में थी और लगातार अपनी मां को मैसेज कर मदद मांग रही थी.
विशेष रूप से 7 मई का एक चैट सामने आया है, जिसमें ट्वीशा ने अपनी मां से लिखा, “मुझे आकर ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे.” एक अन्य संदेश में उसने यह भी कहा कि उस पर बच्चे को लेकर शक किया जा रहा था और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था.
परिवार का दावा है कि ट्वीशा को पहले बुरी तरह पीटा गया और फिर फांसी पर लटकाकर इसे आत्महत्या का रूप दे दिया गया. वहीं ससुराल पक्ष पर प्रभावशाली पद का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया जा रहा है. त्रिशा की सास रिटायर्ड जज हैं और पति पेशे से वकील है, ऐसे में परिवार को न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने का डर है.
परिजन चाहते हैं कि मामले की सुनवाई किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर हो और स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही, वे दूसरे पोस्टमार्टम पर अड़े हुए हैं.
इसी बीच आज मामले में पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है. दूसरी ओर, यह भी माना जा रहा है कि परिवार अदालत में आधिकारिक रूप से दूसरी पोस्टमार्टम की मांग रख सकता है.
यह मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली, पारिवारिक आरोपों और सच्चाई की लड़ाई बन चुका है. सभी की नजर आज कोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी है.