TMC candidate withdrawal FALTA: शुभेंदु का हंटर या डर? वोटिंग से पहले TMC के ‘पुष्पा’ ने मैदान छोड़ा

TMC candidate withdrawal FALTA:  कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है. हिंसा, कार्रवाई और चुनावी टकराव के बीच सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक सख्ती ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं.
हाल ही में कोलकाता और आसनसोल सहित कई इलाकों में हुई हिंसा के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. उपद्रव और तोड़फोड़ में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर सड़कों पर उनकी परेड कराई गई. पुलिस की इस कार्रवाई की तस्वीरें पहली बार सामने आई हैं, जिनमें आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाया जा रहा है, ताकि ऐसा करने वालों को स्पष्ट संदेश दिया जा सके.
इसी बीच पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर राजनीति ने अचानक नया मोड़ ले लिया. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता जहांगीर खान, जो खुद को “पुष्पा” बताते हुए “झुकेंगे नहीं” का दावा कर रहे थे, उन्होंने चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया. यह निर्णय वोटिंग से महज 48 घंटे पहले आया, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया.
जहांगीर खान को टीएमसी में अभिषेक बनर्जी का करीबी और प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है. उन्होंने पहले बीजेपी को खुली चुनौती दी थी कि पार्टी चाहे जितना मजबूत उम्मीदवार उतार दे, फालता में जीत नहीं सकती. लेकिन अब अचानक चुनाव से हटने के उनके फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
अपने बयान में जहांगीर खान ने कहा कि वह “फालता का बेटा” हैं और इलाके में शांति और विकास चाहते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की योजनाओं की सराहना करते हुए चुनाव से हटने का फैसला लिया. माना जा रहा है कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव, संभावित हार या कार्रवाई के डर की वजह से लिया गया हो सकता है.
दरअसल, फालता सीट पर पहले चरण के मतदान के दौरान हिंसा की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद 21 मई को पुनर्मतदान तय हुआ है. इसी माहौल में बीजेपी ने प्रचार की कमान खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में दी. शुभेंदु ने अपनी रैलियों में सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि “पुष्पा अब झुकेगा”, और अब जहांगीर के फैसले को उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती तेज हो गई है. कई जगहों पर अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाया गया है. आरोप है कि सरकारी जमीन पर टीएमसी से जुड़े लोगों ने अवैध निर्माण कर रखा था, जिसे हटाया गया.
सबसे बड़ी कार्रवाई की आहट अब टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचती दिख रही है. कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी के घरों को लेकर नोटिस जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर अवैध निर्माण हटाने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है. चेतावनी दी गई है कि समय सीमा में निर्माण नहीं हटाया गया तो प्रशासन खुद बुलडोजर कार्रवाई करेगा और उसका खर्च भी वसूला जाएगा.
इसके अलावा, साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी एक विवादित संरचना को भी हटाने की तैयारी है, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन किया गया बताया जाता है. नए प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल “अनावश्यक ढांचों” पर नहीं होना चाहिए.
उधर टीएमसी ने इन कार्रवाइयों को “चयनात्मक” बताते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई की जा रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है और विपक्ष को दबाने की कोशिश है.
कुल मिलाकर, बंगाल की राजनीति इस समय बेहद गर्म है. एक तरफ कानून-व्यवस्था के नाम पर सख्ती दिखाई जा रही है, तो दूसरी तरफ इसे सियासी बदले की कार्रवाई बताया जा रहा है. आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने की उम्मीद है.

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