ट्रंप मियां तो निकले बड़े खिलाड़ी, जंग रोकने का ऐलान करके किया अरबों का खेल

  • 19:04
  • प्रकाशित: मार्च 24, 2026

ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान पूरी दुनिया में बहस का मुद्दा बन गया है. सवाल उठ रहे हैं- क्या यह युद्ध को शांत करने की कोशिश थी या फिर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का तरीका? ट्रंप ने अचानक ऐलान किया कि अमेरिका अगले 5 दिन तक ईरान के किसी पावर प्लांट पर हमला नहीं करेगा. इसके तुरंत बाद जो कुछ अमेरिकी शेयर बाजार में हुआ, उसने इस फैसले के पीछे की मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

एक घंटे में 3 ट्रिलियन डॉलर का उतार‑चढ़ाव

अमेरिकी समय के मुताबिक सुबह 7:04 बजे, ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर “सकारात्मक बातचीत” हुई है. महज 6 मिनट बाद, 7:10 बजे, अमेरिकी शेयर बाजार 240 अंक उछल गया. कुल मिलाकर मार्केट कैप में करीब 2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़त दर्ज की गई- भारतीय मुद्रा में लगभग ₹80 लाख करोड़, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर नहीं टिकी. 

सुबह 7:37 बजे, ईरान के विदेश मंत्रालय और संसद अध्यक्ष ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “फेक न्यूज” करार दे दिया. इसके बाद 8:00 बजे, अमेरिकी बाजार 120 अंक गिर गया और करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी ₹90 लाख करोड़ की वैल्यू हवा हो गई. मतलब, एक घंटे से भी कम समय में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर का खेल सिर्फ एक बयान से हो गया.

इतना पैसा कितना बड़ा होता है?

तुलना के लिए:
इटली की GDP: $2.54 ट्रिलियन
कनाडा की GDP: $2.54 ट्रिलियन
ब्राजील: $2.26 ट्रिलियन
स्पेन: $1.89 ट्रिलियन

यानि कुछ ही मिनटों में बाजार में उतार‑चढ़ाव इतना बड़ा था, जितनी कई देशों की पूरी अर्थव्यवस्था.

क्या जानबूझकर दिया गया बयान?

सबसे बड़ा सवाल- अगर युद्ध रुका ही नहीं था, हमले जारी थे, तो फिर ट्रंप को 5 दिन की मोहलत वाला बयान देने की जरूरत क्या थी? आरोप यह भी है कि इस बयान से पहले इनसाइडर ट्रेडिंग हो सकती है.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के ऐलान से सिर्फ 15 मिनट पहले तेल के फ्यूचर मार्केट में करीब $80 मिलियन (₹5,200 करोड़) का बड़ा दांव लगाया गया. इससे शक और गहरा हो गया कि क्या यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि सोचा‑समझा आर्थिक खेल था.

युद्ध जारी, पर ‘डील’ की बातें

ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के “कुछ समझदार और ताकतवर लोगों” से बात कर रहे हैं, लेकिन आज तक यह साफ नहीं किया कि आखिर वह नेता कौन है. वहीं, दूसरी ओर- ईरान ने बातचीत से इनकार किया. मिसाइल हमले जारी रहे. मिडल ईस्ट में तबाही कम नहीं हुई

यानी युद्ध थमा नहीं, लेकिन बाजार में डॉलर की बारिश जरूर हो गई. विशेषज्ञों की राय: ट्रंप को चाहिए था ‘ऑफ‑रैम्प’. भारतीय पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनार के मुताबिक, अमेरिका अपने घोषित तीनों लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया.

ईरान में सत्ता परिवर्तन — नहीं हुआ
परमाणु ठिकानों का पूर्ण विनाश — प्रमाण नहीं
मिसाइल क्षमता खत्म करना — ईरान अब भी मिसाइल दाग रहा है

इसके उलट अमेरिका को बढ़ती महंगाई, ऊंचे तेल दाम, शेयर बाजार में गिरावट,  भारी सैन्य खर्च का सामना करना पड़ रहा है।

ऑपरेशन फ्यूरी या ऑपरेशन फेल?

24 दिनों में अमेरिका इस जंग पर करीब $29 बिलियन खर्च कर चुका है. लेकिन शेयर बाजार में एक घंटे के खेल से इससे कहीं ज्यादा रकम “कमा” ली गई. इसी वजह से अमेरिकी मीडिया में अब कहा जा रहा है. “Operation Fury” से ज्यादा यह “Operation Money” था. 

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