Prateek Yadav Last Rites: प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार ससुर ने क्यों किया?

Prateek Yadav Last Rites: समाजवादी परिवार के सदस्य प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार आज पूरा हो गया, लेकिन उनके निधन के बाद कई सवाल पीछे छोड़ गया है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रतीक यादव का अंत सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी है, या इसके पीछे सियासत का कोई बड़ा संदेश भी छिपा है.

आज लखनऊ में निकली प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा में ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी. इस अंतिम यात्रा में समाजवादी पार्टी के नेता ही नहीं, बल्कि बीजेपी के नेता भी नजर आए. शिवपाल यादव, धर्मेंद्र यादव, अखिलेश यादव के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा.

अंतिम यात्रा के दौरान मुलायम परिवार एकजुट दिखाई दिया. अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और अन्य परिवारजन साथ खड़े नजर आए. यह तस्वीरें एकता का संदेश देती दिखीं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 चुनाव के नजरिए से भी देख रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही जब प्रतीक यादव को मुखाग्नि दी गई. परंपरा के अनुसार यह जिम्मेदारी आमतौर पर बेटे या करीबी परिजनों की होती है, लेकिन प्रतीक यादव को मुखाग्नि उनके ससुर अरविंद बिष्ट ने दी. इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि परिवार के अन्य सदस्य, खासकर भाई या राजनीतिक वारिस इस भूमिका में क्यों नहीं दिखे.

अंतिम संस्कार में भावुक क्षण भी देखने को मिले. खासकर तब, जब अखिलेश यादव अपनी छोटी भतीजी को गोद में लेकर उसे संभालते नजर आए. यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और लोगों के दिलों को छू गई. प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव, जो फिलहाल बीजेपी से जुड़ी हैं, भी अंतिम यात्रा में मौजूद रहीं. ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सपा और बीजेपी के बीच एक अनकही राजनीतिक कड़ी भी नजर आ रही है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अंतिम यात्रा ने मुलायम परिवार की एकजुटता का संदेश तो दिया ही, साथ ही बीजेपी और यादव परिवार के बीच संभावित समीकरणों की झलक भी दिखाई है. खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं.

प्रतीक यादव की जिंदगी जहां कारोबार और निजी संघर्षों के बीच उलझी रही, वहीं उनका अंतिम संस्कार भी कई सवालों और संकेतों के साथ चर्चा में आ गया है. अब देखना होगा कि यह घटनाक्रम सिर्फ एक पारिवारिक क्षण बनकर रह जाता है या आने वाले समय में सियासत पर भी असर डालता है.
 

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