राजनीति में जब भी किसी काम की शुरुआत होती है, तो अक्सर कोई न कोई नाराज दिखाई देता है. अब इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों में इस्तेमाल हुआ "नाराज फूफा" शब्द राजनीतिक चर्चा का नया विषय बन गया है. दरअसल, भारतीय राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद की परंपरा कोई नई बात नहीं है. लगभग हर राजनीतिक दल में पारिवारिक रिश्तों की मौजूदगी देखने को मिलती है. कहीं पिता-पुत्र की जोड़ी है, तो कहीं मां-बेटे या मां-बेटी की. कई दलों में चाचा-भतीजा, बुआ-भतीजा, भाई-बहन, दामाद और अन्य पारिवारिक रिश्ते भी राजनीति का हिस्सा रहे हैं. यानी अगर देखा जाए तो राजनीति में परिवार के लगभग हर रिश्ते की मौजूदगी पहले से रही है, लेकिन एक किरदार की कमी महसूस की जा रही थी, और वह था "फूफा". अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान के बाद राजनीति में "नाराज फूफा" की भी एंट्री हो गई है.