नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए 5 अरब डॉलर की जरूरत है. नेपाल ने अब सिर्फ मदद नहीं, बल्कि क्लाइमेट कॉम्पेंसेशन मांगा है. विदेश मंत्री ने UN और चीन-अमेरिका-भारत को लेटर भेजकर कहा है कि नेपाल जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार है लेकिन मार सबसे ज्यादा हम पर पड़ रही है. चीन-अमेरिका सबसे ज्यादा औद्योगिक कचरा फैलाते हैं, ग्लेशियर पिघलने से बाढ़ आई, इसलिए हर्जाना बड़े देश दें.
एक खतरे से उभर रहे नेपाल पर दूसरा खतरा मंडरा रहा है. तिब्बत बॉर्डर पर जीरोम पोर्ट के पास 26 अगस्त की बाढ़ के मलबे से एक कृत्रिम झील बन गई है. चीन ने अलर्ट जारी किया है कि अगर ये झील फटी तो नेपाल को बचने के लिए सिर्फ 30 मिनट मिलेंगे. चीन कह रहा है सैटेलाइट-ड्रोन से निगरानी कर रहे हैं और 30 मिनट पहले अलर्ट देंगे, जबकि नेपाल का आरोप है चीन ने पहले भी सिर्फ भारी बारिश का अलर्ट दिया, ग्लेशियर-बर्फीले तूफान की जानकारी नहीं दी. 28 अगस्त को भी झील फटने से रेस्क्यू रोकना पड़ा था.