4000 फीट नीचे गिरा ग्लेशियर, 5.2 तीव्रता का झटका और 7 मिनट में बहा 22 KM का सैलाब; नेपाल जलप्रलय का पूरा सच

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  • प्रकाशित: सितम्बर 07, 2026

नेपाल में आई भीषण त्रासदी का मुख्य कारण एक विशाल ग्लेशियर का अचानक टूटना था. लगभग 28 फुटबॉल स्टेडियमों के बराबर क्षेत्रफल वाला ग्लेशियर का हिस्सा सुबह 8:37 बजे करीब 4,000 फीट नीचे गिरा, जिससे 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका पैदा हुआ. जमीन से टकराने पर घर्षण और भारी दबाव के कारण बर्फ तेजी से पिघली और मलबे का सैलाब 193 किमी/घंटे की रफ्तार से नीचे की ओर बहा. शुरुआत में इस सैलाब ने 22 किमी की दूरी महज 6 मिनट 50 सेकंड में तय कर ली, हालांकि आगे चलकर ढलान कम होने और मलबे के कारण इसकी रफ्तार रसुआ में 73 किमी/घंटा और त्रिशूली में 55 किमी/घंटा हो गई. टूटे हुए ग्लेशियर की ऊंचाई 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' जैसी 8 प्रतिमाओं के बराबर थी. भविष्य में ऐसे खतरों से बचने के लिए हिमालयी ग्लेशियर झीलों पर 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' लगाने की मांग तेज हो गई है.

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