ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई से त्रस्त जनता का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. देश में अशांति की लहर लगातार 11वें दिन भी जारी है. कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं. सोशल मीडिया पर इन झड़पों के वीडियो वायरल हो रहे हैं. सवाल यह है कि क्या ईरान में कोई ऐसा विपक्ष मौजूद है जो सुप्रीम लीडर अली खामनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहता है?
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन एचआरए एएनए के अनुसार विरोध अब तक ईरान के सभी 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों में फैल चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अशांति के दौरान कम से कम 34 प्रदर्शनकारी और 4 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं, जबकि 220 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. फार्स न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि दक्षिण-पश्चिमी शहर लोडेगन में हथियारबंद व्यक्तियों ने दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी.
ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने इन प्रदर्शनों को निर्णायक संकेत बताया है. वहीं, इराक स्थित ईरानी कुर्द विपक्षी दलों ने हड़ताल का आह्वान किया है. अमेरिका भी हालात पर नजर बनाए हुए है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरानी सेना नागरिकों पर दमन करती है तो अमेरिका हस्तक्षेप के लिए तैयार है. ईरानी सेना ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
शाही परिवार और समर्थक गुट
अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के बेटे रेजा पहलवी अमेरिका में निर्वासन में हैं. वे अहिंसक विरोध और जनमत संग्रह के जरिए शासन परिवर्तन की मांग कर रहे हैं. हालांकि, राजशाही की वापसी का विचार देश के भीतर कितना लोकप्रिय है, यह स्पष्ट नहीं है.
पीपल्स मुजाहिदीन संगठन (MEK)
यह वामपंथी समूह 1970 के दशक में शाह की सरकार और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ सक्रिय था. बाद में इस्लामी गणराज्य का विरोध करने लगा. इसके नेता मसूद राजावी लंबे समय से गायब हैं और उनकी पत्नी मरियम राजावी संगठन का नेतृत्व कर रही हैं. पश्चिमी देशों में इनकी सक्रिय उपस्थिति है.
जातीय अल्पसंख्यक समूह
ईरान के सुन्नी मुस्लिम कुर्द और बलूच अक्सर तेहरान की शिया सरकार से नाराज रहते हैं. कई कुर्द समूह पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय विद्रोह कर चुके हैं. बलूचिस्तान में भी तेहरान विरोधी ताकतें मौजूद हैं.
समय-समय पर होने वाले जन आंदोलन
2009 के चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर विरोध हुआ. 2022 में महिला अधिकारों पर केंद्रित आंदोलन ने महीनों तक सरकार को चुनौती दी. मौजूदा आंदोलन आर्थिक संकट के मुद्दे पर है.
आगे क्या होगा?
ईरान में हालात तेजी से बदल रहे हैं. खामनेई की सत्ता कितने दिन टिक पाएगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जनता को मनाने में कितनी सफल होती है. फिलहाल, देश में असंतोष गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय नजरें ईरान पर टिकी हैं.
(इनपुट- एजेंसियां)