पश्चिम बंगाल में सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज कोलकाता की सड़कों पर उतर आईं. उनके निशाने पर केंद्र सरकार और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) है. वजह? एक ग्रीन फाइल, जिसे लेकर ममता ने दावा किया कि इसमें उनकी चुनावी रणनीति है और बीजेपी इसे चुराना चाहती है.
क्या है ग्रीन फाइल का रहस्य?
आईपैक (I-PAC) के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और एक ग्रीन फाइल लेकर बाहर निकल गईं. इसी फाइल को लेकर बंगाल से दिल्ली तक बवाल मचा है. ममता का आरोप है कि बीजेपी एजेंसियों का इस्तेमाल कर उनकी चुनावी स्ट्रेटजी लूटना चाहती है.
टीएमसी का दिल्ली तक प्रदर्शन
कोलकाता ही नहीं, दिल्ली में भी टीएमसी सांसदों ने गृह मंत्रालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. डेरेक ओ’ब्रायन, कीर्ति आजाद और महुआ मोइत्रा समेत आठ सांसदों ने नारेबाजी की. पुलिस ने उन्हें हटाया क्योंकि मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी.
ममता का सीधा हमला
ममता ने कहा: “क्या ईडी का काम उम्मीदवारों की सूची चुराना है?” “प्रधानमंत्री जी, अपने गृह मंत्री को कंट्रोल कीजिए. “बीजेपी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन बंगाल में दादागिरी नहीं चलेगी.”
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने ममता पर गंभीर आरोप लगाए। रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ममता का काम अनैतिक और असंवैधानिक है. “ईडी की जांच रोकना कानून का उल्लंघन है. “ममता को डर है कि उनके घोटालों के राज खुल जाएंगे.”
मामला कोर्ट तक पहुंचा
ईडी ने कोलकाता हाईकोर्ट में कहा कि उनके अधिकारियों को बंधक बनाया गया, दस्तावेज छीने गए और गवाहों को धमकाया गया. अब ईडी सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है. यानी यह लड़ाई अब बंगाल से निकलकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच सकती है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह पहला मौका नहीं है जब ममता ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला.
2019: शारदा चिट फंड केस में सीबीआई टीम को पुलिस ने रोका, ममता धरने पर बैठीं.
2021: नारद केस में मंत्रियों की गिरफ्तारी पर सीबीआई दफ्तर में धरना.
2026 चुनाव से पहले सियासी संग्राम
बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव हैं. उससे पहले यह टकराव बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है. टीएमसी इसे एजेंसियों की दादागिरी बता रही है, जबकि बीजेपी इसे भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश कह रही है.