पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए, अब गणतंत्र दिवस पर गरजेंगीं ऑपरेशन सिंदूर की शान 105 MM गन, देखें VIDEO

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  • प्रकाशित: जनवरी 21, 2026

भारतीय सेना की स्वदेशी ताकत एक बार फिर देश की राजधानी में गूंजने वाली है. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर 21 तोपों की सलामी स्वदेश निर्मित जीलाइट फील्ड गन से दी जाएगी. इस ऐतिहासिक क्षण की तैयारियां जोर‑शोर से चल रही हैं. इससे पहले स्वतंत्रता दिवस पर भी इन्हीं तोपों ने दिल्ली की हवा में राष्ट्रभावना की गर्जना भरी थी.

ऑपरेशन सिंदूर का शौर्य: जब स्वदेशी हथियारों ने पाकिस्तान को झुकाया
भारत के सैन्य इतिहास में ऑपरेशन सिंदूर एक ऐसा अध्याय है, जिसने स्वदेशी हथियारों की मारक क्षमता को साबित किया था. इस अभियान में भारतीय 105 MM इंडियन फील्ड गन ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. इन तोपों की धमक और सटीक निशानेबाजी ने युद्धक्षेत्र में भारत की बढ़त सुनिश्चित की थी. अब वही ऐतिहासिक गर्जना लाल किले से दोबारा सुनाई दी, जब अभ्यास के दौरान इन तोपों ने आसमान को देशभक्ति के शोर से भर दिया.

जीलाइट फील्ड गन: आधुनिकता और स्वदेशीकरण का प्रतीक
भारत की नई पीढ़ी की यह स्वदेशी तोप की खासियतें इसे पहले की तोपों से अलग बनाती हैं.
मारक क्षमता: 17.2 किलोमीटर
फायरिंग स्पीड: प्रति मिनट 6 गोले
वजन: पुरानी फील्ड गनों से लगभग 1000 किलोग्राम हल्की
सटीकता: अत्याधुनिक सिस्टम व बेहतर स्थिरता
ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन का इतिहास

गणतंत्र दिवस सलामी अभ्यास के दौरान आठ तोपों ने केवल 52 सेकंड में 21 गोले दागे. यह न सिर्फ सटीकता का, बल्कि भारतीय सेना की तालमेल और स्वदेशी क्षमता का अद्भुत प्रदर्शन था.

 26 जनवरी 1950 को दी गई थी पहली बार 21 तोपों की सलामी 
बता दें कि 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ था और इसी वजह से हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. इसी दिन पहली बार 21 तोपों की सलामी भी दी गई थी. दरअसल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुराने संसद भवन के दरबार हॉल में इसी दिन राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की थी और इसके बाद वह इरविन स्टेडियम (आज का मेजर ध्यानचंद स्टेडियम) पहुंचे थे. यहां पर उन्होंने पहले गणतंत्र दिवस पर झंडा लहराया था. इसके साथ ही 21 तोपों की सलामी भी दी गई थी. 

क्यों दी जाती है 21 तोपों की सलामी 
इंडिया आफ्टर गांधी किताब में बताया गया है कि 26 जनवरी 1950 को देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने झंडा फहराया था. इसके बाद तीन राउंड में 21 तोपों की सलामी दी गई थी. जानकारी के मुताबिक 21 तोपों की सलामी को 52 सेकेंड में पूरा किया जाता है क्योंकि राष्ट्रगान भी 52 सेकेंड में पूरा होता है. झंडा फहराने के साथ ही राष्ट्रगान शुरू होता है और बैकग्राउंड में 21 तोपों की सलामी दी जाती है. 

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