नई दिल्ली. देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ती हुई नजर आ रही है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया संकेतों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है और महंगाई पर काबू पाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
ग्लोबल स्तर पर एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक स्थिति का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका और मजबूत हो जाएगी. इससे न सिर्फ ईंधन महंगा होगा, बल्कि परिवहन लागत भी बढ़ेगी, जिसका असर हर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.
सरकार की ओर से भी संकेत मिले हैं कि तेल कंपनियों को लगातार घाटा हो रहा है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी पहले ही कह चुके हैं कि पिछले चार सालों से कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है और तेल कंपनियों को रोज़ाना करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है. ऐसे में आने वाले समय में ईंधन के दाम बढ़ाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
महंगाई का असर पहले ही कई सेक्टरों में दिखने लगा है. सोने के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है और चांदी की कीमत भी तेजी से बढ़ी है. वहीं दूध और CNG जैसी जरूरी चीजों के दाम भी ऊपर जा चुके हैं. यानी महंगाई का दबाव अब हर तरफ महसूस किया जा रहा है.
इसी बीच, देश के कई हिस्सों से पेट्रोल-डीजल की रेशनिंग और पंप बंद होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे लोगों में घबराहट बढ़ गई है. कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो पेट्रोल-नो डीजल’ के बोर्ड लगाए गए हैं और कहीं-कहीं तय सीमा से ज्यादा ईंधन देने से मना किया जा रहा है. हालांकि सरकार की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं हुई है.
जहां कुछ पंप बंद हैं, वहीं खुले पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाकर स्टॉक करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है. आम लोगों का कहना है कि उन्हें थोड़ी मात्रा में ईंधन पाने के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईंधन बचाने की अपील की है और खुद अपने काफिले को छोटा कर एक उदाहरण पेश किया है. हालांकि उनके इस कदम से एक नई बहस छिड़ गई है—क्या सुरक्षा के लिहाज से प्रधानमंत्री का काफिला कम होना चाहिए?
कुल मिलाकर, देश में महंगाई और ईंधन संकट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक 5 जून को होनी है, जिसमें ब्याज दरों को लेकर फैसला होगा. लेकिन उससे पहले ही बाजार और आम जनता की नजर पेट्रोल-डीजल के दामों पर टिक गई है.