VIDEO: देहरादून से सटे पहाड़ी इलाकों में 'बर्फ का कर्फ्यू', स्नोफॉल ने बढ़ाई खूबसूरती लेकिन लोगों पर टूटा सफेद कहर

बर्फबारी ने इलाके की खूबसूरती को चार-चांद तो लगा दिया है, लेकिन दूसरी ओर स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात ये हैं कि लोग घर से बाहर निकलने में असहाय हैं और जरूरी सामान की चिंता सताने लगी है.

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  • उत्तराखंड के चकराता के ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी के कारण तीन से चार फीट मोटी बर्फ की परत जम गई है
  • बर्फबारी से सड़कें बंद हो गई हैं और स्थानीय लोग घरों में कैद होकर जरूरी सामान की चिंता में हैं
  • मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और शीतलहर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है
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देहरादून:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मशहूर पर्यटन स्थल चकराता के ऊंचे इलाकों में हिमयुग ने दस्तक दे दी है. यहां चारों ओर बर्फ का साम्राज्य कायम हो चुका है, जिसकी तस्दीक बर्फ से सफेद हुए लोखंडी से सामने आई ताजा तस्वीरें कर रही हैं. चकराता के अधिकतम ऊंचाई वाले इलाकों में कुदरत ने सफेद कहर बरपाया है, जिसकी चपेट में आकर पूरा इलाका मानो हिमयुग में तब्दील हो गया.

यहां आसमान से गिरी बर्फ ने कब्जा जमाते हुए जमीन पर 3 से 4 फीट तक मोटी बर्फ की परत जमा दी, जिसके चलते जो जहां था, वहीं थम गया है. स्थानीय लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं. मुख्यालय से इन इलाकों का संपर्क कट गया है.

यहां लोखंडी समेत कोटी कनासर, बुनेर मोईलाटोप, जाडी धारनाधार समेत आसपास के इलाकों में सड़कें, पेड़, पहाड़, मकान और वाहन सब कुछ बर्फ के आगोश में समा चुके हैं. हर तरफ सिर्फ़ सफेदी और सन्नाटा नजर आ रहा है. इन इलाके में बर्फबारी के चलते रास्ते पूरी तरह ठप हो चुके हैं.

बर्फबारी ने इलाके की खूबसूरती को चार-चांद तो लगा दिया है, लेकिन दूसरी ओर स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात ये हैं कि लोग घर से बाहर निकलने में असहाय हैं और जरूरी सामान की चिंता सताने लगी है. कल तक यहां जो लोग बर्फ को नेमत मान रहे थे, अब वो ही इसे आफत मानने लग गए हैं.

हालांकि इन इलाकों में बर्फ के कर्फ्यू के बीच भी स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन मौसम का मिजाज बता रहा है कि आने वाले घंटों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है. जिससे चकराता पहुंचने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की दुश्वारियां और बढ़ सकती हैं.

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घने बादलों के बीच कड़ाके की ठंड के चलते हिमाचल प्रदेश में ठिठुरन बढ़ गई. वहीं भारी बर्फबारी के बाद राज्य में दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 680 से अधिक सड़कों पर यातायात बाधित है. बर्फबारी के कारण 5,775 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों घरों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है.

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राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान इस मौसम के औसत के आसपास दर्ज किया गया है. लाहौल-स्पीति जिले के कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान शून्य से 7.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया.

मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में रविवार को भी भारी बर्फबारी होने का अनुमान जताया है. इसके साथ ही कई जिलों के लिए घने कोहरे और शीतलहर को लेकर ‘येलो अलर्ट' जारी किया गया है.

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हिमालय के इलाकों में हर साल बर्फ पड़ती है और उसकी वजह वेस्टर्न डिस्टरबेंस ही होता है. अंतर बस इतना रहा कि जिस बर्फबारी की शुरुआत आम तौर पर दिसंबर के महीने में होती है वो नहीं हो पाई. इसकी वज़ह क्लाइमेट चेंज रही, जिससे हिमालय के दक्षिण यानि भारत में मौसम शुष्क ही बना रहा. अक्टूबर के महीने के बाद बारिश हुई ही नहीं और ऐसा होना इस बर्फबारी से ज्यादा असामान्य था.