- रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वे उन्होंने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया.
- वीडियो में विधायक कहते सुनाई दे रहे हैं कि "जो अधिकारी मेरी नहीं सुनेगा, वह मेरे जूते की सुनेगा."
- उन्होंने पूर्व विधायक डॉ. हरक सिंह रावत पर तंज कसा और कहा कि सैनिक स्कूल की घोषणा करने वाले गायब हैं.
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से विधायक भरत सिंह चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में विधायक कहते सुनाई दे रहे हैं कि “जो अधिकारी मेरी नहीं सुनेगा, वह मेरे जूते की सुनेगा.” विधायक का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं और यूजर्स उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं.
विधायक भरत सिंह चौधरी का यह वायरल वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना है. बताया जा रहा है कि यह रुद्रप्रयाग जनपद के बड़मा पट्टी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान का है. कार्यक्रम में संबोधन के दौरान विधायक भरत सिंह चौधरी ने कहा कि बड़मा क्षेत्र में सैनिक स्कूल बनाए जाने की घोषणा करने वाले नेता अब गायब हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल भले ही न बन पाए, लेकिन बड़मा में वेटनरी मेडिकल कॉलेज अवश्य बनाया जाएगा.
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पूर्व विधायक डॉ. रावत पर भी कसा तंज
इस दौरान विधायक चौधरी ने कांग्रेस नेता और रुद्रप्रयाग के पूर्व विधायक डॉ. हरक सिंह रावत पर तंज कसा और कहा कि 'आ गया हरक, पड़ गया फरक' कहने वाले अब नजर नहीं आते.
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोग इस पर लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई लोग इसे जनप्रतिनिधि की गरिमा के खिलाफ बता रहे हैं. वायरल वीडियो को लेकर विधायक भरत सिंह चौधरी का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उनका कोई वीडियो वायरल हो रहा है.
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विवादों के कारण पहले भी रहे हैं चर्चा में
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विधायक भरत सिंह चौधरी किसी विवाद को लेकर सुर्खियों में आए हों. पिछले साल तिलनी क्षेत्र में महिलाओं के साथ उनकी नोकझोंक का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उस दौरान क्षेत्र में हुई एक दुर्घटना के बाद स्थानीय लोग लगातार सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे. घटना के कारण लगे जाम में विधायक फंस गए थे, जिसके बाद मौके पर मौजूद महिलाओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था. इसके अलावा अगस्त्यमुनि में स्टेडियम निर्माण को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी वे पहले ट्रोल हो चुके हैं.
अब एक बार फिर अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान ने रूद्रप्रयाग जिले के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है.














