Kedarnath Yatra 2026: बाबा के दरबार में पहुंचे 3 लाख से ज्यादा भक्त, लेकिन प्लास्टिक कचरे ने बढ़ाई चिंता

केदारनाथ यात्रा 2026 में अब तक तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंच चुके हैं. जहां एक ओर आस्था का सैलाब उमड़ा है, वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक कचरे ने पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यात्रा मार्ग पर सफाई कर्मी मुस्तैद हैं, लेकिन लापरवाही से मंदाकिनी नदी तक कचरा पहुंच रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Kedarnath Yatra 2026: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा इस साल आस्था के नए शिखर छू रही है. कपाट खुलने के बाद से लगातार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बाबा के दर्शन के लिए पहुंच रही है. अब तक तीन लाख से ज्यादा भक्त केदारनाथ धाम में मत्था टेक चुके हैं. एक ओर जहां भक्तों की आस्था देखते ही बनती है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.

रूद्रप्रयाग से रोहित डिमरी की रिपोर्ट...

तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु कर चुके हैं दर्शन

22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से केदारनाथ यात्रा पूरे जोर पर है. हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम पहुंच रहे हैं. यात्रा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक भक्तों की चहल‑पहल बनी हुई है और प्रशासन यात्रा को सुचारू रूप से चलाने में जुटा है.

सफाई की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे 400 कर्मचारी

यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई नायक सीतापुर से लेकर केदारनाथ धाम तक तैनात हैं. ये कर्मचारी दिन‑रात मेहनत कर रास्तों, पड़ावों और धाम क्षेत्र में सफाई संभाल रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो.

प्लास्टिक कचरे से बिगड़ रही स्थिति

सफाई कर्मचारियों की मेहनत के बावजूद कुछ स्थानीय व्यापारी और असामाजिक तत्व लापरवाही दिखा रहे हैं. यात्रा मार्ग और ठहराव स्थलों पर खुलेआम प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि प्लास्टिक का कचरा सीधे मंदाकिनी नदी में जाता नजर आ रहा है, जिससे पर्यावरण और पवित्र नदी दोनों पर खतरा बढ़ गया है.

Advertisement

प्लास्टिक प्रोसेसिंग और कचरा निस्तारण की व्यवस्था

प्रशासन ने कचरे के निस्तारण के लिए सोनप्रयाग में प्लास्टिक कॉम्पैक्ट करने की मशीनें लगाई हैं. अब तक करीब 5 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है. वहीं, गीला कचरा रोजाना 5 से 6 डंपरों के जरिए रुद्रप्रयाग के डंपिंग जोन में भेजा जा रहा है.

लापरवाही पड़ी भारी, खतरे में पवित्रता

प्रशासन और सफाई कर्मचारियों की पूरी कोशिश के बावजूद कुछ लोगों की लापरवाही पूरे सिस्टम को कमजोर कर रही है. अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह पवित्र यात्रा पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है. केदारनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक संतुलन बचाने के लिए अब केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं और व्यापारियों की भी जिम्मेदारी बनती है. 

Advertisement
Featured Video Of The Day
समोसा को सिग्नेचर डिश बनाने पर ज्वाइंट कमिश्नर का बयान