चारधाम यात्री सावधान; 39 दिनों में 105 श्रद्धालुओं की मौत, केदारनाथ में सबसे ज्यादा, इन बातों का रखें ध्यान

Char Dham Yatra Deaths: उत्तराखंड चारधाम यात्रा में 39 दिनों में 105 श्रद्धालुओं की मौत. केदारनाथ में सबसे ज्यादा मामले. प्रशासन ने हेल्थ एडवाइजरी जारी की. जानिए किन बातों का रखना है खास ध्यान.

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उत्तराखंड चारधाम यात्रा में बड़ा अलर्ट: 39 दिनों में 105 श्रद्धालुओं की मौत, केदारनाथ में सबसे ज्यादा आंकड़ा

Char Dham Yatra Deaths: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा को लेकर बड़ा स्वास्थ्य अलर्ट सामने आया है. 19 अप्रैल से शुरू हुई इस धार्मिक यात्रा के महज 39 दिनों के भीतर 105 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जिससे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. इनमें 104 यात्रियों की मौत स्वास्थ्य खराब होने के कारण हुई, जबकि एक श्रद्धालु की जान प्राकृतिक आपदा में गई. सबसे अधिक मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं. लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस यात्रा में तेजी से बढ़ रहे मौतों के आंकड़े अब यात्रा की कठिन परिस्थितियों और यात्रियों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. प्रशासन ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है.

23 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक चारधाम यात्रा में 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं. हर साल की तरह इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में लोग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो रही हैं.

Char Dham Yatra Deaths: चार धाम यात्रा के दौरान मौतों का आंकड़ा

केदारनाथ में सबसे ज्यादा 50 मौतें

चारधाम यात्रा के दौरान सबसे अधिक मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं, जहां अब तक 50 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है. इसके अलावा बद्रीनाथ धाम में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री धाम में 10 यात्रियों की मौत हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार, केदारनाथ और यमुनोत्री की यात्रा सबसे अधिक कठिन मानी जाती है, जहां पैदल चढ़ाई और ऊंचाई ज्यादा है.

ऊंचाई और मौसम बना मुख्य चुनौती

चारों धाम समुद्र तल से करीब 3000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं. उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण यहां का मौसम बेहद कठिन और अनिश्चित होता है. यहां ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, तापमान अचानक गिर सकता है और कभी भी बारिश या बर्फबारी हो सकती है. इन परिस्थितियों में सामान्य शरीर के लिए खुद को ढालना आसान नहीं होता.

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मैदानी इलाकों से आने वाले यात्रियों पर ज्यादा असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि ज्यादातर यात्री मैदानी इलाकों से आते हैं, जहां तापमान 40 से 48 डिग्री तक रहता है. ऐसे में अचानक ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में पहुंचने पर शरीर पर दबाव बढ़ जाता है. इस बदलाव के कारण कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं.

दिल और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए जोखिम

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक यानी हृदय गति रुकने के कारण हुई हैं. हृदय संबंधी रोग, हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह यात्रा ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है. कठिन चढ़ाई और ठंड के कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है.

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प्रशासन की एडवाइजरी और चेतावनी

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि यात्रा को लेकर पहले ही विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई थी. उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि जिन लोगों को गंभीर बीमारी है, वे यात्रा पर आने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें. साथ ही मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट साथ रखें और आवश्यक दवाएं भी अपने पास रखें.

यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां

विशेषज्ञों और प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि:

  • यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं
  • धीरे-धीरे चढ़ाई करें, जल्दबाजी न करें
  • पर्याप्त पानी और भोजन लेते रहें
  • ऊंचाई पर रुक-रुक कर शरीर को अनुकूल बनाएं
  • किसी भी असुविधा पर तुरंत मेडिकल सहायता लें

आस्था के साथ सतर्कता जरूरी

चारधाम यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है, लेकिन यह यात्रा जितनी पवित्र है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी. बढ़ते मौतों के आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन यात्रियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सावधानी बरतनी होगी, ताकि यात्रा सुरक्षित और सफल हो सके.

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