- देहरादून में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले महापंचायत आयोजित की गई
- महापंचायत ने अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने संबंधित 5 प्रस्ताव रखे गए
- अंकिता भंडारी के माता-पिता भी इस महापंचायत में शामिल हुए और निष्पक्ष न्याय की मांग की
उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीवीआईपी को सजा दिलवाने और सीबीआई की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग को लेकर देहरादून में महापंचायत रखी गई है. ये महापंचायत 'अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मोर्चा' के बैनर के ताले की गई. महापंचायत में अंकित के माता और पिता भी शामिल हुए. महापंचायत में पांच प्रस्तावों को पारित किया गया है. इसके साथ ही महापंचायत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को लेकर पत्र भी भेजा गया है.
महापंचायत में रखे गए ये 5 प्रस्ताव
1- अंकिता भंडारी के माता-पिता, सोनी देवी और वीरेंद्र सिंह भंडारी द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गये पत्र को सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माना जाए और उसी के आधार पर सीबीआई जांच, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करवाई जाए.
2- अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच, मामले से पूरी तरह असंबद्ध व्यक्ति अनिल प्रकाश जोशी की एफआईआर पर कराए जाने के फैसले को पूरी तरह खारिज करती है. अंकिता हत्याकांड से संबंधित पूर्व में लक्ष्मण झूला ऋषिकेश थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 01/2022 के तहत ही आरोपित वीआईपी और सबूत मिटाने वालों को केंद्र में रख कर ही आगे की जांच करवाई जाए.
3- अंकिता हत्याकांड के बाद रातों-रात बुलडोजर द्वारा वनन्तरा रिज़ॉर्ट के बड़े हिस्से को ध्वस्त करके साक्ष्यों को नष्ट किया गया, जिसकी अनुमति मुख्यमंत्री द्वारा दी गई थी. इसको देखते हुए इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच जब तक पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना नैतिक एवं क़ानूनी रूप से उचित नहीं है. पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए, इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में बाधा बनी रहेगी. इसलिए जब तक जांच कार्यवाही पूरी हो या न्यायलय का निर्णय नहीं आ जाए, तब तक मुख्यमंत्री को स्वयं पद से हट जाना चाहिए.
4. बीजेपी के दो पदाधिकारियों दुष्यंत कुमार गौतम और अजय कुमार का नाम, क्योंकि भाजपा से ही जुड़े लोगों ने वीआईपी के तौर पर लिया है, इसलिए यह महापंचायत मांग करती है कि इन दोनों को तत्काल जांच के दायरे में लाया जाये और भाजपा के द्वारा इन दोनों को तत्काल इनके पदों से हटाया जाये और इन्हें जांच में सहयोग करने के लिए निर्देशित करे.
5. यह महा पंचायत यह चेतावनी देती है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर इस हत्याकांड में शामिल वीआईपी के खुलासे की, जो सीबीआई जांच अनिल जोशी की एफआइआर पर शुरू की जा रही है, उसको दरकिनार करते हुए सीबीआई जांच को पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर ही आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो उत्तराखण्ड की समस्त जनता सम्पूर्ण उत्तराखंड में एक व्यापक शांतिपूर्ण जनांदोलन के लिए बाध्य होगी.
CBI के हाथों में सौंपी जा चुकी है केस की जांच
बता दें कि अंकिता भंडारी मर्डर केस की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है. साथ ही, इस मामले में दिल्ली स्थित स्पेशल क्राइम ब्रांच ने एक वीआईपी के खिलाफ केस दर्ज किया है. सीबीआई की टीम के दो सदस्य सोमवार देर रात उत्तराखंड पहुंचे, ताकि लड़की की हत्या से जुड़े कथित वीआईपी एंगल की डिटेल में जांच कर सकें. यह केस उस वक्त फिर से सुर्खियों में आया जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप और वीडियो सामने आए.
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एक फेसबुक लाइव के दौरान, सनावर ने हत्या में एक वीआईपी के कथित तौर पर शामिल होने का जिक्र किया, जिससे नया विवाद और पब्लिक में बहस शुरू हो गई. इन घटनाओं से राजनीतिक तनाव बढ़ गया और विपक्षी पार्टियों और कई संगठनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग फिर से शुरू कर दी. बढ़ते दबाव और लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए, उत्तराखंड सरकार ने ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए और 9 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की. सरकार ने दोहराया कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी रसूख या पद पर हो, कानून से बचने नहीं दिया जाएगा और ज़ोर दिया कि पूरा सच सामने लाना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
कैसे हुई अंकिता भंडारी की हत्या?
बता दें कि 19 साल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या से 2022 में पूरे उत्तराखंड में बहुत गुस्सा फैल गया. अंकिता भंडारी 18 सितंबर, 2022 को वनतंत्र रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं, जब उनकी हत्या कर दी गई. उनकी बॉडी चिल्ला शक्ति नहर में फेंक दी गई और लगभग एक हफ्ते बाद मिली थी. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा पूरी जांच के बाद, मामले में 500 पेज की चार्जशीट फाइल की गई, जिसमें 97 गवाहों के नाम थे, जिनमें से 47 ने कोर्ट के सामने गवाही दी. इस मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी वनतंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या, साथ ही सह-आरोपी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई. पुलकित आर्या को हत्या, सबूतों से छेड़छाड़, उत्पीड़न और अनैतिक तस्करी सहित कई गंभीर आरोपों के तहत दोषी पाया गया.
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