- जेवर एयरपोर्ट के लिए दयानतपुर गांव की लगभग 700 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई, जिससे ग्रामीणों को मुआवजा मिला
- मुआवजे की रकम से गांव के कई लोग कृषि और कंस्ट्रक्शन जैसे व्यवसायों में निवेश कर आर्थिक रूप से मजबूत हुए
- गांव के व्यवसायों में सुधार हुआ है, जैसे जनरल स्टोर की दुकानें बढ़ी हैं और नई वस्तुएं उपलब्ध हो रही हैं
पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन कर दिया है, लेकिन अब लाजिम सवाल ये है कि एयरपोर्ट बनने के बाद उसके आसपास के गांवों की ज़िंदगी में क्या कुछ बदला. इसी बदलाव को करीब से समझने के लिए NDTV की टीम जेवर एयरपोर्ट से सटे दयानतपुर, रन्हेला और नंगला गांव पहुंची. दयानतपुर की करीब 700 हेक्टेयर जमीन जेवर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण में गई है. करीब 8000 की आबादी वाले इस गांव के ज़्यादातर लोगों को एक करोड़ रुपये से ज़्यादा का मुआवजा मिला है. गांव की तस्वीरें अब पहले जैसी नहीं रहीं.
घेर में भैंस नहीं, SUV खड़ी है
हम गांव में ललित शर्मा के घेर पर पहुंचे, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आमतौर पर घेर का मतलब मवेशी, चारा और चौपाल से होता है, लेकिन इस घेर में भैंस नहीं दिखाई दे रही है. अब यहां काली रंग की SUV खड़ी मिली. अंदर दाख़िल होते ही लॉन में झूला और AC लगे चार कमरों की एक आलीशान कोठी दिखाई दी. ललित शर्मा का परिवार गांव के दूसरे हिस्से में रहता है और यह घेर केवल दोस्तों की बैठक के तौर पर इस्तेमाल होता है. ललित शर्मा बताते हैं कि कई साल पहले जब नोएडा में लोगों को मुआवजा मिला था, तो कई लोगों ने गाड़ी और मकान में पैसा लगाकर उसे खर्च कर दिया और आज वे गार्ड की नौकरी कर रहे हैं. उसी अनुभव को देखते हुए उन्होंने मुआवजे के पैसों को अपने काम में लगाया.
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40 बीघा जमीन गई, 5 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा मिला
ललित शर्मा बताते हैं कि जेवर एयरपोर्ट के लिए उनकी 40 बीघा जमीन अधिग्रहण में गई थी, जिसके बदले उन्हें 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा मिला. इस रकम से उन्होंने बुलंदशहर में खेत खरीदे और अपने कंस्ट्रक्शन के काम में निवेश किया. जेवर एयरपोर्ट बनने के बाद उनका कंस्ट्रक्शन का काम लगातार बढ़ रहा है. पास में खड़े उनके चाचा रघुनंदन बताते हैं कि कुछ साल पहले तक उन्हें साइकिल खरीदने से पहले सोचना पड़ता था, लेकिन आज उनके दरवाजे पर दो‑दो गाड़ियां खड़ी हैं. उनका एक बेटा गांव छोड़कर ग्रेटर नोएडा चला गया है, जहां उसने कोठी बनाई है और वहीं अपना बिजनेस कर रहा है. रघुनंदन बताते हैं कि गांव के कुछ लोग पहले टैक्सी चलाते थे, लेकिन अब उनके पास भी दो‑दो गाड़ियां हैं.
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गांव में सिर्फ मकान नहीं, कारोबार भी बदले
दयानतपुर गांव में हमें एक बड़ी जनरल स्टोर की दुकान पर हरीश चंद्र गोयल मिले, जो अपनी दुकान दिखाते हुए वह बताते हैं कि उन्होंने साल 1968 में गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान खोली थी तब वह तेल, मसाले और गुड़ बेचा करते थे. मगर जेवर एयरपोर्ट आने के बाद गांव की आमदनी बढ़ी तो कारोबार भी बदला. हरीश चंद्र गोयल कहते हैं कि अब उनकी दुकान पर कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट समेत ऐसी कोई चीज नहीं है, जो न मिलती हो. वह बताते हैं कि गांव वालों की मांग बढ़ने के बाद 2022‑23 में उन्होंने पुरानी दुकान छोड़कर बड़ी दुकान ली. अब उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है, क्योंकि गांव के लोगों का कारोबार भी बढ़ा है.
एक करोड़ पर 60 हजार रुपये महीना ब्याज
गांव से बाहर निकलते समय हमें योगेश्वर नाम के एक बुज़ुर्ग मिले, जो पुरानी सी साइकिल से जा रहे थे. उन्होंने बताया कि गांव के लगभग सभी परिवारों को मुआवजा मिला है. लोगों ने या तो मुआवजे के पैसे को कारोबार में लगाया है या फिर बैंक में जमा कर दिया है, जिससे घर बैठे ब्याज आ रहा है और जिंदगी अच्छे से चल रही है. जब उनसे उनकी आमदनी के बारे में पूछा गया तो पहले उन्होंने कहा-कुछ नहीं. फिर हंसते हुए बोले कि ब्याज तो आता ही है. उन्होंने कहा कि साइकिल देखकर यह मत समझिए कि मैं गरीब हूं. बैंक में एक करोड़ रुपये जमा हैं, जिससे हर महीने 60 हजार रुपये ब्याज मिलता है, इसके अलावा थोड़ी खेती भी करते हैं.
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पुरानी हवेलियों पर ताले, नई कोठियां खड़ी
गांव में ही ब्रह्मदत्त मिले, वह अपने पुराने घर की ओर इशारा करते हुए बताते हैं कि यहां कभी ढाई सौ लोगों का परिवार रहता था. लेकिन जैसे‑जैसे आमदनी बढ़ी, लोगों ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद में कोठियां बनवा लीं. आज उस पुराने घर में सन्नाटा पसरा है. गांव में चारों तरफ जो नए मकान बने हैं, वे तीन‑चार साल पुराने हैं, जबकि कई पुरानी हवेलियों के दरवाज़ों पर ताले लटके हुए हैं.
CSR फंड से स्किल डेवलपमेंट और तालाब की मरम्मत
दयानतपुर गांव के तालाब पर HCL कंपनी की मरम्मत का बोर्ड लगा है. ब्रह्मदत्त बताते हैं कि दयानतपुर, रन्हेरा और नंगला शरीफ जैसे गांवों के लोगों के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए गए हैं, ताकि युवाओं को होटल, लोडिंग और कंप्यूटर से जुड़े काम मिल सकें. एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी कंपनियों का दावा है कि CSR योजनाओं के तहत 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा का फंड इन गांवों में लगाया गया है.
एयरपोर्ट की वजह से आ रही कौन-कौन सी कंपनियां
एयरपोर्ट बनने से कई बड़ी बड़ी कंपनियों ने निवेश किया है. जेवर एयरपोर्ट के अंदर रोजिएल्ट होटल का निर्माण हो रहा है, इसके अलावा हैंड अरे सूटस, होटल एयरलिंक और आहलूवालिया ग्रुप के भी होटल अपने विस्तार में लगे हैं. दयानतपुर के रहने वाले रघुनंदन बताते हैं कि जबसे 5 और 7 सितारा होटल बनने की बात पता लगी है, वो खुश हैं क्योंकि उनका बेटा दिल्ली के हयात होटल में काम करता है. अगर ये होटल बनते हैं तो उसे गांव में ही नौकरी मिल जाएगी. इसी तरह कई बड़ी कंपनियां इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब बना रही है. ये निवेश टाटा और अड़ानी ग्रुप कर रहा है, जिससे 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है. इन गांवों की ओर जाते हुए आपको कई अत्याधुनिक गोदाम के निर्माण चलने की तस्वीर भी दिखेगी. इसके अलावा कई टेक कंपनियां और मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां भी आ रही है. इसमें मुख्यतौर पर फॉक्सकॉन और हैवेल्स इंडिया शामिल है. इसी वजह से कई गगांव में स्किल इंडिया के काम को बढ़ावा दिया जा रहा है..














