- काशी विद्वत परिषद ने मणिकर्णिका घाट पर मसान की होली के आयोजन को शास्त्र विरोधी बताते हुए इसका विरोध किया है.
- परिषद के अनुसार चिता भस्म की होली केवल भगवान शिव के लिए है और सामान्य लोगों को इसका अधिकार नहीं है.
- मसान नाथ सेवा समिति के संयोजक गुलशन कपूर ने कहा कि मसान की होली काशी की पुरानी परंपरा है.
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हर साल रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन मणिकर्निका घाट पर होने वाली मसान की होली का काशी विद्वत परिषद ने विरोध किया है. परिषद के महामंत्री और प्रवक्ता प्रो० रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि श्मशान घाट पर चिता भस्म की होली खेलने का शास्त्रों में कोई प्रमाण नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि आज जिस तरह युवक, युवतियां शोर-शराबे के बीच नाचते गाते हुए श्मशान स्थल पर होली खेलते हैं, ऐसी कोई परंपरा प्राचीन बनारस में कभी नहीं रही. द्विवेदी के अनुसार काशी में चिता भस्म की होली केवल महादेव शिव जी खेलते हैं और साधारण गृहस्थ लोगों को इसका अधिकार नहीं है.
'चिता भस्म की होली पर रोक लगाना उचित नहीं..'
काशी विद्वत परिषद के मत के उलट, मसान की होली के समर्थन में गुलशन कपूर ने कहा कि यह काशी की बहुत पुरानी परंपरा है और इसमें कोई बुराई नहीं है. बनारस के मणिकर्णिका घाट पर बाबा मसान नाथ सेवा समिति के संयोजक गुलशन कपूर का कहना है कि आज के समय में युवाओं के बीच मसान की होली काफी लोकप्रिय हो चुकी है और प्रतिवर्ष इस आयोजन में शामिल होने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में श्मशान घाट पर होने वाली चिता भस्म की होली पर रोक लगाना उचित नहीं.
कपूर के अनुसार होली से पहले काशी में रंगभरी एकादशी के दिन नगर के वासी बाबा विश्वनाथ संग होली खेलते हैं और इसी परंपरा में मसान की होली खेली जाती है. इसमें सभी लोग शामिल होते हैं. मसान की होली को प्राचीन परंपरा बताने का विरोध करते हुए काशी विद्वत परिषद के मंत्री एवं बीएचयू में ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर विनय पांडेय ने बताया कि इस तरह की होली का विधान मनुष्यों के लिए नहीं है. यह केवल भगवान शंकर की लीलाओं का एक अंग है. उन्होंने कहा कि काशी का सबसे विस्तृत वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है. लेकिन काशी खंड मे मसान की होली का कोई उल्लेख नहीं है. शिव पुराण मे भी मसान की होली का कोई उल्लेख नहीं है.
अनूठी है काशी की मसान होली
मसान होली को काशी की अनोखी होली माना जाता है.
दुनिया में काशी ऐसी एकमात्र जगह है जहां मृत्यु और मोक्ष के प्रतीक महाश्मशान में चिता की भस्म से होली खेली जाती है.
मसान की होली में भक्त भगवान शिव के स्वरूप मशाननाथ के विग्रह पर गुलाल और चिता की राख चढ़ाकर इस होली की शुरुआत करते हैं.
काशी में पूरे छह दिन होली
- काशी में होली का उत्सव पूरे छह दिन तक मनाया जाता है.
- रंगभरी एकादशी के दिन काशी के विश्वनाथ मंदिर में बाबा काशी विश्वनाथ और माता पार्वती के विवाहोत्सव के बाद होली खेली जाती है.
- इसके अगले दिन मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट मसान होली का आयोजन पर होता है.
- मसान होली में अघारी और साधु संत चिता की भस्म से होली खेलते हैं.














