UP SIR: शहरी क्षेत्र में ज्यादा कटे नाम.. विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए टेंशन?

UP SIR List Update: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं. कन्नौज में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं. इन तीन सीटों में क़रीब पौने 3 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं.

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  • उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में कुल वोटर्स की संख्या तेरह करोड़ उनतालीस लाख चौवन हजार बयासी हो गई है.
  • एसआईआर प्रक्रिया के बाद कुल दो करोड़ 5 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं और नए वोटर भी जुड़े हैं.
  • मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षा के विपरीत कम वोटर्स के नाम कटे हैं जबकि अन्य जिलों में ज्यादा नाम कटे हैं.
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लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में एसआईआर (UP SIR List) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई तरह के कयास उलट पड़ते दिखाई दे रहे हैं. विपक्षी राजनैतिक दलों का दावा था कि धर्म के आधार पर वोट काटे जा रहे हैं. लेकिन अंतिम मतदाता सूची (Uttar Pradesh final voter list) जारी होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उसे देखकर ये कहा जा सकता है कि नतीजे उल्टे दिखाई दे रहे हैं. मुस्लिम बहुल जिलों की तुलना में उन जिलों में ज़्यादा वोट कटने के आंकड़े मिले हैं, जहां मुस्लिम आबादी कम है और बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा था. 

UP SIR List :  फाइनल लिस्ट में क्या हुआ? 

बात करें अंतिम मतदाता (UP Final Voter List) सूची कि तो यूपी में अब कुल वोटर्स की संख्या 13,39,84,792 हो गई है. ड्राफ्ट सूची में ये आंकड़ा 12,55,56,025 था. एसआईआर से पहले यूपी में कुल वोटर्स की संख्या 15 करोड़ 44 लाख वोटर्स थे. एसआईआर शुरू होने के बाद जब ड्राफ्ट सूची आई थी, तब 2 करोड़ 89 लाख नाम कट गए थे. हालांकि, ड्राफ्ट लिस्ट के बाद वोटर्स को एक मौका और दिया जाता है. इस दौरान 84,28,767 वोट जुड़ गए. यानी यूपी में एसआईआर की प्रक्रिया में कुल 2 करोड़ 5 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं. 

मुस्लिम बहुल जिलों में कम कटे नाम 

दावा था कि मुस्लिम इलाकों में जानबूझकर वोट काटे जा रहे हैं. लेकिन जब अंतिम मतदाता सूची जारी हुई तो नतीजा ऐसा नहीं था. सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में वोट उतने नहीं कटे, जितने सोचे जा रहे थे. सहारनपुर में कुल 4 लाख 32 हजार वोटर्स के नाम कटे हैं और 22 लाख 10 हजार वोटर्स के नाम कायम हैं. इसी तरह मुरादाबाद में कुल 2,48,116 वोट कटे हैं. एसआईआर से पहले मुरादाबाद में कुल 24,59,455 वोटर्स थे वहीं एसआईआर के बाद अब कुल 22,11,339 वोटर्स बचे हैं. रामपुर की बात करें तो यहां 2 लाख 16 हजार नाम कटे हैं. पहले रामपुर में 17,57,741 वोट थे, वहीं एसआईआर के बाद कुल 15,41,073 रह गए हैं. 

Uttar Pradesh voter list  : लखनऊ मंडल में कटे सबसे ज़्यादा नाम 

यूपी में कुल 18 मंडल यानी कमिश्नरी है. इनमें सबसे अधिक वोट लखनऊ मंडल में कटे हैं. लखनऊ मंडल में 20.40 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं. वहीं, मेरठ मंडल में 20.68 लाख और कानपुर मंडल me 15.75 लाख वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट में नहीं आए हैं. इसके बाद प्रयागराज मंडल में 15.44 लाख वोटर और बरेली मंडल में 13.78 लाख वोटर के नाम काटे गए हैं. सबसे कम वोट्स चित्रकूट मंडल में कटे हैं, जहां 3.06 लाख वोटर्स के नाम काटे गए हैं. मंडल के आधार पर मुस्लिम बहुल इलाका मुरादाबाद मंडल का माना जाता है, जो ना सबसे अधिक में शामिल है और ना सबसे कम की श्रेणी में आ रहा है. 

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सीएम योगी के ज़िले में क्या हुआ? 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर की बात करें तो यहां कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. इनमें कुल 4 लाख 21 हज़ार 092 नाम कट गए हैं. यहां एसआईआर के बाद कुल वोटर्स की संख्या 32 लाख 45 हज़ार 441 बची है. एसआईआर से पहले गोरखपुर के कुल 36 लाख 66 हजार 533 मतदाता थे. ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 6 लाख 45 हज़ार मतदाताओं के नाम काट दिए गए. हालांकि नाम जोड़ने के अभियान में कुल 2 लाख 42 हजार 645 के नाम जुड़ गए और 18 हजार 132 नाम पार्टियों के आधार पर कट गए.

अखिलेश के ज़िले का क्या हाल 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद हैं. कन्नौज में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं. इन तीन सीटों में क़रीब पौने 3 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं. कन्नौज में कुल वोटर्स की संख्या 10 लाख 67 हजार 932 रह गई है. पहले जिले की तीनों विधानसभाओं में 12 लाख 89 हजार 220 मतदाता थे. अभियान के दौरान करीब 2 लाख 80 हजार मतदाता गायब मिले. जिन्हे एब्सेंट की श्रेणी में रखकर कई बार ढूंढने की कोशिश हुई, लेकिन न मिलने पर सभी नाम काट दिये गये. 55 हजार के करीब नये वोटर बढ़े हैं, जिन्हे मिलाकर फाइनल लिस्ट में 10 लाख 67 हजार 220 वोटर हुये हैं. 

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बीजेपी का सिरदर्द बढ़ा 

सत्ता में बैठी भारतीय जनता पार्टी पर विपक्ष ने चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया. वहीं बीजेपी नेतृत्व की चिंता ये है कि वो शहरी इलाक़े जहां उसका प्रभाव ज़्यादा रहा है, वहां ज़्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं. ऐसे में कहीं ये एसआईआर उनके लिए मुश्किल ना पैदा कर दे. बीजेपी ने अपने एजेंट को कई बार बैठकें करके अपने वोटर्स के नाम जुड़वाने का अभियान चलाया लेकिन फाइनल वोटर लिस्ट देखकर पार्टी नेतृत्व के माथे की चिंता बढ़ गई है. अब बीजेपी फाइनल वोटर्स लिस्ट के आधार पर अपना नया डेटा बैंक तैयार करने का काम करेगी. 

सपा भी फूंक-फूंककर रख रही कदम 

समाजवादी पार्टी ने अपने बूथ लेवल इवेंट्स को पूरे एसआईआर में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने का अभियान चलाया. इस अभियान में शामिल कार्यकर्ताओं को पीडीए प्रहरी का नाम दिया गया. सपा का कहना है कि उनके प्रहरियों ने अपने वोट बचाने के लिए बूथ लेवल पर बहुत मेहनत की है. चुनाव आयोग पर निष्पक्ष ना होने का आरोप लगाने के साथ सपा का मानना है कि उनके कार्यकर्ताओं की मेहनत की वजह से ही जितने वोट काटे जा सकते थे, उतने नहीं कटे. हालांकि सपा को अभी आशंका है कि उनके वोटर्स के साथ “खेल” ना हुआ हो, इसलिए वो पूरे वोटर्स लिस्ट की छानबीन कर रहे हैं. 

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