- UP में अप्रैल 2025 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को सीएम ने धांधली के आरोपों पर रद्द कर दिया गया.
- इस भर्ती परीक्षा में 33 विषयों के 910 पदों के लिए एक लाख से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.
- परीक्षा में फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले तीन आरोपियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था.
UP Assistant Professor Exam Cancelled: पढ़ाई करो, बहाली का इंतजार करो. जब बहाली आए तो फॉर्म भरो, फिर तैयारी करो, परीक्षा दो. लेकिन जब रिजल्ट और नौकरी की बारी आए तो पता चले कि धांधली के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई है. बुधवार को ऐसा ही कुछ हुआ यूपी में. जहां भर्ती परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इंटरव्यू का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अटक गया. दरअसल UP सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अप्रैल 2025 में हुई परीक्षा को रद्द कर दिया. इस भर्ती परीक्षा में करीब एक लाख आवेदन आए थे.
33 विषयों के 910 असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए मांगे गए थे आवेदन
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPHESC) ने 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों के लिए यह बहाली निकाली थी. रिपोर्ट के अनुसार इस बहाली के लिए एक लाख से ज्यादा आवेदन आए थे. 16 और 17 अप्रैल, 2025 को राज्य के 52 केंद्रों पर परीक्षा हुई थी. लेकिन इस बीच परीक्षा में धांधली की बात सामने आई.
दरअसल इस परीक्षा में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली की शिकायतें सामने आई थीं. इन शिकायतों के आधार पर सीएम ने गोपनीय जांच के आदेश दिए थे. जांच के बाद अब इस परीक्षा को रद्द करने का आदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिया है.
परीक्षा में धांधली के तीन आरोपी हुए थे गिरफ्तार
बयान में बताया गया कि मामले की गंभीरता के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए थे, जिस पर एसटीएफ ने पिछले साल 20 अप्रैल को असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन अभियुक्तों महबूब अली, वैजनाथ पाल एवं विनय पाल को गिरफ्तार किया था.
आयोग अध्यक्ष का गोपनीय सहायक निकला लीक का आरोपी
राज्य में 16 और 17 अप्रैल को परीक्षा हुई थी. पुलिस ने बताया कि अभियुक्त महबूब अली निवर्तमान आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था. बयान के मुताबिक, इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की निष्पक्षता एवं गोपनीयता सुनिश्चित रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया था.
जांच में परीक्षा में धांधली की हुई पुष्टि
बयान में बताया गया कि पूछताछ के दौरान अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसके द्वारा प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र निकाल लिए गए थे. अभियुक्त महबूब अली की कबूलनामे की एसटीएफ द्वारा गहन विवेचना एवं डेटा एनालिसिस से पुष्टि हुई है. बयान के मुताबिक, प्राप्त डेटा के मिलान में यह बात साफ हो गई थी कि परीक्षा में धांधली हुई.
फिर से आयोजित होगी परीक्षा
बयान में बताया गया कि इन तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री ने इस परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया. योगी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया कि परीक्षा का आयोजन जल्द से जल्द पूर्णतः निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए.
यह भी पढ़ें - UP में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा निरस्त, योगी सरकार का बड़ा फैसला














