- उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार
- आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में रहकर संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी
- दानियाल अशरफ और कृष्णा मिश्रा ने पुलिस थाने और सरकारी इमारतों के वीडियो व फोटो पाकिस्तान भेजे थे
उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. इस मामले में एटीएस ने दो आरोपियों, दानियाल अशरफ और कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों के अनुसार, ये दोनों आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे और भारत के संवेदनशील संस्थानों, पुलिस ठिकानों तथा सुरक्षाबलों पर हमले की साजिश रच रहे थे.
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने की साजिश
एटीएस को खुफिया इनपुट मिला था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़े लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं. इन युवाओं को पहले दोस्ती और आर्थिक लालच का प्रलोभन दिया जाता है, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाता है. इसी इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए एटीएस ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को धर दबोचा.
up ats busts pakistan linked terror module two arrested
संवेदनशील स्थानों की रेकी और पाकिस्तान को डेटा भेजना
जांच में यह तथ्य सामने आया कि बाराबंकी निवासी दानियाल अशरफ और कुशीनगर निवासी कृष्णा मिश्रा पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स शहजाद भट्टी और आबिद जट के सीधे संपर्क में थे. ये दोनों आरोपी भारत में विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों के वीडियो और फोटो बनाकर पाकिस्तान भेज रहे थे. इनमें पुलिस थाने, सरकारी इमारतें और अन्य संवेदनशील स्थान शामिल थे. माना जा रहा है कि इन जानकारियों का उपयोग भविष्य में बड़े हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाना था.
गिरफ्तारी और बरामदगी
तकनीकी सर्विलांस और पुख्ता सबूतों के आधार पर एटीएस ने 5 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए कृष्णा मिश्रा को गोरखपुर से और दानियाल अशरफ को बाराबंकी से गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आए थे. शुरुआत में उन्हें छोटे कार्य सौंपे गए थे, लेकिन बाद में उन्हें बड़ी आतंकी साजिशों का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही थी.
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनमें संवेदनशील जगहों के वीडियो, फोटो और संदिग्ध चैट्स शामिल हैं. चैट्स के विश्लेषण से पता चला है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स हमले की योजना, लोकेशन और टारगेट्स को लेकर निर्देश दे रहे थे. इसके साथ ही आरोपियों को वित्तीय लालच दिए जाने की पुष्टि भी हुई है.
एटीएस के मुताबिक, दानियाल अशरफ को एक ऐसा वीडियो बनाने का कार्य दिया गया था जिसमें किसी पुलिस स्टेशन या अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान की विस्तृत जानकारी हो. वहीं, कृष्णा मिश्रा के फोन से कई संदिग्ध ऑडियो-वीडियो क्लिप्स मिली हैं, जिनमें हमले से जुड़े स्पष्ट निर्देश दिए गए थे.
कानूनी कार्रवाई और बरामद हथियार
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है. एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मॉड्यूल की जड़ें कितनी गहरी हैं.
बरामदगी के विवरण के अनुसार, दानियाल अशरफ के पास से एक देसी पिस्टल, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया गया है. वहीं, कृष्णा मिश्रा के पास से .315 बोर का तमंचा, कारतूस और मोबाइल फोन मिला है.
फिलहाल एटीएस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोशल मीडिया के जरिए गुमराह किए गए अन्य लोग इस नेटवर्क का हिस्सा न हों. यह घटना एक बार फिर स्पष्ट करती है कि सीमा पार बैठी ताकतें किस तरह डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर देश की सुरक्षा को चुनौती देने का प्रयास कर रही हैं.
यह भी पढ़ें- कोख में पल रहे दो बच्चे को मारा, बांझ का ताना देकर पति ने रचाई दूसरी शादी, डॉक्टर रुबिया खान का दर्द














