यूपी चुनाव 2027: दो-तीन महीने पहले ही प्रत्याशी उतार देंगे अखिलेश, सपा-कांग्रेस में 80 सीटों पर बन सकती है बात

यूपी चुनाव 2027 को लेकर सपा ने मास्टरस्ट्रोक खेला है. अखिलेश यादव बगावत रोकने के लिए चुनाव से 3 महीने पहले ही टिकट घोषित करेंगे, वहीं लोकसभा की सफलता दोहराने के लिए कांग्रेस के साथ 80 सीटों के आसपास गठबंधन का फार्मूला तैयार हो रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins

UP Assembly Election Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अभी करीब 8 महीने का समय बचा है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. सपा इस बार चुनाव की घोषणा होने से दो-तीन महीने पहले ही अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करने की तैयारी में है, ताकि उन्हें प्रचार का पूरा मौका मिल सके. इसके साथ ही, आगामी चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को अमलीजामा पहनाने और सीट शेयरिंग को लेकर भी भीतरखाने मंथन का दौर काफी तेज हो गया है. बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव 2024 की तर्ज पर जमीनी सर्वे और सटीक जातीय समीकरणों के आधार पर एक-एक सीट का गुणा-भाग खुद कर रहे हैं.

पैरवी नहीं, पकड़ के आधार पर मिलेगा टिकट

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव इन दिनों जिला इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि सपा ने पूरे उत्तर प्रदेश में एक जमीनी सर्वे कराया है, जिसमें स्थानीय मुद्दे, नेताओं की छवि और वहां के जातीय आंकड़ों की पूरी कुंडली तैयार की गई है.

अखिलेश यादव जिला स्तर के नेताओं की रिपोर्ट का मिलान अपनी सर्वे रिपोर्ट से कर रहे हैं. इस बार टिकट बंटवारे में किसी नेता की पैरवी या सिफारिश काम नहीं आने वाली है, बल्कि जनता के बीच उसकी पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता को ही एकमात्र आधार बनाया जा रहा है.

जिन सीटों पर मजबूत उम्मीदवार तय हो रहे हैं, उन्हें बिना किसी शोर-शराबे के अभी से चुपचाप क्षेत्र में जुटने की हरी झंडी दी जा रही है.

जल्दी टिकट बांटने के पीछे सपा की खास सोच

ऐन चुनाव के वक्त टिकट घोषित होने से कई बार पार्टियों को बगावत और भीतरघात का सामना करना पड़ता है. सपा का मानना है कि अगर उम्मीदवारों के नाम दो-तीन महीने पहले तय हो जाएंगे, तो रूठे हुए नेताओं को मनाने और बगावत को शांत करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा. इसके अलावा, चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशी को अपने क्षेत्र के एक-एक गांव और मतदाता तक पहुंचने का पूरा मौका मिलेगा, जिससे चुनाव के नतीजे बेहतर हो सकते हैं. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार पार्टी इस आंकड़े को बहुत आगे ले जाना चाहती है.

Advertisement

कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का क्या है फार्मूला?

लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को मिली बड़ी सफलता के बाद दोनों दल 2027 का विधानसभा चुनाव भी मिलकर लड़ने जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों पर तालमेल बिठाने के लिए अभी से फॉर्मूले पर चर्चा शुरू हो गई है.

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस शुरुआती बातचीत में करीब 120 सीटों की मांग रख सकती है. हालांकि, जमीन पर दोनों दलों की ताकत को देखते हुए अंतिम समझौता 80 सीटों के आसपास होने की उम्मीद है.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सांसदों, विधायकों और जिला अध्यक्षों से साफ तौर पर पूछा है कि उनके इलाकों में कांग्रेस को कौन-कौन सी सीटें दी जा सकती हैं, जहां वह मजबूत स्थिति में हो.

Advertisement

क्या रहे थे पिछले चुनाव के नतीजे?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं. साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था और सपा को 111 सीटें हासिल हुई थीं. हालांकि, अब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. सुभासपा अब सपा के साथ नहीं है, बल्कि सपा अब 'इंडिया अलायंस' (INDIA Alliance) के तहत कांग्रेस के साथ खड़ी है. दोनों दलों के इस नए साथ का असर पिछले लोकसभा चुनाव में साफ देखने को मिला था. लोकसभा चुनाव में जब सपा और कांग्रेस मिलकर मैदान में उतरे, तो नतीजे बेहद शानदार रहे. इस गठबंधन ने यूपी में कमाल करते हुए बड़ी जीत दर्ज की, जिसमें अकेले समाजवादी पार्टी को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें हासिल हुईं. इसी बड़ी कामयाबी के हौसले के दम पर दोनों दल अब 2027 फतह करने की तैयारी में हैं

जमीन पर बेचैनी पर आलाकमान को भरोसा

सपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व यानी अखिलेश यादव और राहुल गांधी पूरी तरह से गठबंधन के पक्ष में हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि साथ मिलकर ही वे सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर दे सकते हैं. हालांकि, इस गठबंधन की वजह से जमीनी स्तर के कुछ स्थानीय नेताओं और संभावित उम्मीदवारों में थोड़ी असहजता जरूर है. नेताओं को डर है कि गठबंधन के तहत अगर उनकी दावेदारी वाली सीट दूसरे दल के खाते में चली गई, तो उनका टिकट कट सकता है. इस सबके बावजूद, सपा हर सीट पर अपनी सांगठनिक तैयारी को पुख्ता कर रही है ताकि गठबंधन में जो भी सीट जिसके हिस्से आए, वहां जीत हासिल की जा सके.
ये भी पढ़ें:  यूपी में 2027 चुनाव से पहले उम्मीदवारों का सर्वे करा रही सपा, अखिलेश खुद कर रहे निगरानी

ये भी पढ़ें: महंगाई को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर निशाना, यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर क्या बोले?

Featured Video Of The Day
होटल में 50 विधायकों की 'सीक्रेट मीटिंग'! क्या टूट जाएगी ममता की पार्टी?