यौन उत्पीड़न केस: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद HC से राहत, अग्रिम जमानत पर फैसले तक गिरफ्तारी पर रोक

यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. ये रोक अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला आने तक लगाई गई है.

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद.
IANS
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  • हाई कोर्ट नेयौन उत्पीड़न के आरोपों में फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है
  • प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज हुई थी
  • हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रखते हुए रोक लगाई है
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इलाहाबाद:

नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपों में फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. हाई कोर्ट ने फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों की यौन उत्पीड़न के मामले में 21 फरवरी को प्रयागराज में एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद उन्होंने 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. 

उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि जब तक कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.

अविमुक्तेश्वरानंद के लिए कितनी बड़ी राहत?

प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है.

उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी. फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है. एक तरह से ये स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि फैसला आने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक है. फिलहाल कोर्ट होली की छुट्टी के लिए शनिवार से 9 दिन तक बंद रहेगा. यानी 9 दिन तक तो उन्हें गिरफ्तारी से तो छूट मिल ही गई.

हालांकि, इस दौरान पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है या नहीं, ये तो कोर्ट का ऑर्डर आने के बाद ही पता चलेगा. सरकारी वकील के पास अब एक विकल्प ये है कि वो वेकेशन बेंच में जाकर नए सिरे से याचिका दायर करें. हालांकि, ये पूरी तरह से सरकार के रुख पर तय करेगा.

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क्या है पूरा मामला?

स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और एक नाबालिग सहित दो अन्य व्यक्तियों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. 

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दावा किया था कि हाल ही में प्रयागराज में हुए माघ मेले में एक नाबालिग लड़के समते दो लोग आए थे और उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. अपनी शिकायत में आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि ये कृत्य गुरु सेवा की आड़ में और धार्मिक प्रभाव का दुरुपयोग करके किए गए थे.

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कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. आरोप लगाया है कि आरोपियों ने खुद को धार्मिक उपदेशक बताकर नाबालिग और एक अन्य युवक का पिछले साल कई मौकों पर यौन उत्पीड़न किया था.

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