Exclusive: बंपर पैदावार, मंडियां भी खुलीं... फिर भी आलू को नहीं मिल रहा 'भाव', किसानों की आपबीती

जिस आलू के बगैर हर सब्जी अधूरी लगती है, वही आलू अब बिक नहीं रहा है. बंपर पैदावार हुई है, जिस कारण आलू के दाम जमीन पर आ गए हैं. किसान परेशान हो रहे हैं.

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Agra Potato Farmers
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  • इस साल आलू की बुआई क्षेत्रफल अधिक होने से बाजार में आलू के दाम काफी कम हो गए हैं जिससे किसान परेशान हैं
  • आगरा के खंदौली क्षेत्र में आलू की लागत लगभग 600 रुपये प्रति कट्टा है जबकि बिक्री मूल्य 300-400 रुपये है
  • किसान आलू की फसल को उचित दाम न मिलने के कारण कोल्ड स्टोरेज में रखने को मजबूर हैं
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आगरा:

सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू की हालत इन दिनों बाजार में खराब है. आलू वह सब्जी है जिसके बिना कोई भी रसोई पूरी नहीं होती है पर इन दिनों आलू अपने खरीददार को तरस रहा है. किसान कड़ी मेहनत और लगन से इसकी फसल उगा रहे हैं लेकिन ये बिक ही नहीं रहा है. इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई. पैदावार ज्यादा हुई तो आलू के दाम जमीन पर आ गए. दाम कम होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं. किसान आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने को मजबूर हैं. एक तो पहले से ही कम दाम और ऊपर से कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा... अब दोनों मिलकर किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है.

फसल बंपर लेकिन किसान परेशान

आगरा का खंदौली क्षेत्र आलू प्रधान है और खंदौली के आलू की डिमांड देशभर में रहती है. NDTV ने यहां ग्राउंड पर पहुंचकर किसानों की आपबीती जानी. किसानों का कहना है कि आलू के दाम इन दिनों बाजार में कम है. किसान अपनी कड़ी मेहनत और लगन से आलू की फसल की बुआई करता है और फिर उम्मीद लगाता है कि यह फसल जब निकलेगी तो सारे काम हो जाएंगे. लेकिन अब तक जो व्यापारी सीधे खेत से ही आलू खरीद लेते थे, वह अब पहुंच ही नहीं रहे हैं और अगर कोई व्यापारी जा भी रहा है तो आलू का दाम इतना कम है कि किसान बेच पाने में हिचक रहा है.

कितने का बिक रहा है आलू?

किसानों का कहना है कि आलू के कट्टे की लागत करीब 600 रुपये आती है, जबकि बाजार में इन दिनों एक कट्टा 300 से 400 रुपये में बिक रहा है. एक कट्टे में 53 किलो आलू होता है. लागत से भी कम में बिकने के कारण किसानों को घाटा हो रहा है. फसल की लागत भी न निकल पाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं.

क्या परेशानी भुगत रहे किसान?

आलू की खेती करने वाले किसान दोहरी परेशानी से जूझ रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से भी आलू को लेकर कोई कोशिश जमीन पर नजर नहीं आ रही है. खेत से आलू उचित दाम पर बिक नहीं पा रहा है और अगर कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं तो भाड़ा देना पड़ रहा है. किसानों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी आलू के दाम कम ही रहेंगे.

लेकिन बिक क्यों नहीं रहा आलू?

आलू के न बिक पाने की एक वजह इसकी बंपर पैदावार को माना जा रहा है. हालांकि, किसानों ने बताया कि पैदावार बंपर नहीं है, बल्कि इस साल आलू बुआई का क्षेत्रफल ज्यादा है. हमारी लागत भी नहीं निकल रही है. 

यह हाल सिर्फ आगरा के खदौली का ही नहीं है, बल्कि लगभग सभी जगहों का यही हाल है. मंडी में दाम कम मिल रहे हैं. व्यापारी खेतों में आलू खरीदने नहीं आ रहे हैं. अब अगर कोल्ड स्टोरेज में भी आलू रखते हैं तो भाड़ा देने का नुकसान भी उठाना पड़ेगा. यही कारण है कि किसान परेशान हैं.

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एक कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर ने बताया कि इस साल महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में आलू की बंपर पैदावार हुई है. हमारे क्षेत्र का जो आलू महाराष्ट्र और दक्षिण भारत जाता था, उसमें करीब 75% की कमी आई है, जिसका सीधा असर आलू की कीमत पर पड़ा है.

उनका कहना है कि फिलहाल आलू के दाम ऊपर जाने की उम्मीद नहीं है, पर आने वाले दिनों में बाजार पर अगर दबाव बनता है तो कुछ उम्मीद की जा सकती है.

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