तो 8 अप्रैल को ही मान जाते मजदूर... क्यों भड़का श्रमिकों का आक्रोश, नोएडा के उद्यमियों ने बताई कहानी

Noida News: नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को लेकर अब उद्यमियों की राय भी सामने आई है. उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में करीब दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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Noida Workers Protest
नोएडा:

नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर मजदूरों के विरोध प्रदर्शन पर अब उद्यमी संगठनों की भी राय सामने आई है. नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (Noida Entrepreneur Association) का कहना है कि प्रशासन सक्रिय होता तो 8 अप्रैल को ही मामला शांत हो जाता.फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि हिंसा करने वालों को इनाम और हमें सजा दी गई. हमें 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी में मजदूरी को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ. अगर प्रशासन उस फैक्ट्री में सक्रिय होकर मामले को सुलझा देता तो शायद नोएडा में हिंसा नहीं होती.

नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश तनेजा ने एनडीटीवी से बात करते हुए ये बात कही है. दरअसल, इस फैक्ट्री की एक शाखा मानेसर में है और दूसरी ग्रेटर नोएडा में. फैक्ट्री में मजदूरों का आना जाना होता रहता है, लेकिन जब एक अप्रैल से हरियाणा सरकार ने मजदूरी बढ़ाई तब यूपी और हरियाणा की मजदूरी में अंतर आ गया. यही बात पहले मजदूरों में फैली, फिर दूसरी फैक्ट्रियों के मजदूरों को ये बात पता लगते ही लोग वो लामबंद होना शुरू हो गए.

राकेश तनेजा कहते हैं कि 13 अप्रैल को अलग अलग इलाकों के फैक्ट्रियों के सैकड़ों फोन आए. बड़ा नुक़सान हुआ है और फिर सरकार की तरफ से फरमान आ गया कि 3000 रुपए मजदूरी बढ़ाओ. आप बताइए हिंसा करने वालों को इनाम और हमारा नुकसान हुआ और ऊपर से हमें ही सजा मिल रही है.नोएडा में महिला उद्यमी झूमा विश्वास कहती हैं कि यूपी सरकार जो भी मजदूरी का फैसला लेती है, हम उसको देते हैं. मजदूरों को अगर कोई शिकायत होती है तो वो शिकायत करते हैं, लेकिन ये कहना सही नहीं है कि हम मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं.

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हरियाणा ने कितनी बढ़ाई थी मजदूरी  

नोएडा में मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन में प्रशासन भले ही विदेशी हाथ खोज रही हो लेकिन इस असंतोष की नींव एक अप्रैल को पड़ गई थी जब हरियाणा सरकार ने मजदूरी बढ़ाने का फ़ैसला लिया. हरियाणा ने इस एक अप्रैल से मजदूरों की दिहाड़ी में बढ़ोतरी की. इसमें अकुशल मजदूरों की मजदूरी को 11270 रुपये से बढ़ाकर उसे 15220 रुपये कर दिया. जबकि कुशल मज़दूरों की मजदूरी 13700 से बढ़ाकर 18500 कर दिया गया.

गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले उमेश कहते हैं कि अब आपको समझना होगा नोएडा या ग्रेटर नोएडा लगभग उतना ही मंहगा है जितना गुरुग्राम या फरीदाबाद फिर मजदूरी क्यों अलग अलग है. यहां लगातार सिलेंडर के दाम बढ़ रहे हैं, किराये पर कमरा और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े रहे हैं.वो कहते हैं कि छोटा सिलेंडर पहले 100 रुपये में भरता था और अब दो सौ से तीन सौ रुपये में भर रहा है.दवा से लेकर लगभग सभी सामान मंहगे हुए हैं क्योंकि उनका पैकेजिंग का खर्चा बढ़ा है.

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2000 करोड़ के नुकसान का दावा 

एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी सुधीर श्रीवास्तव कहते हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा मिलाकर करीब 14000 फैक्ट्रियां हैं, यहां रोजाना दो से तीन हजार करोड़ का कारोबार होता है. फैक्ट्रियां बंद होने से करीब दो हजार करोड़ के नुकसान की आशंका है.वो बताते हैं कि इन फैक्ट्रियों में 15 लाख लोग जुड़े हैं.अब आप सोचिए अमेरिका के साथ पहले ट्रेड वॉर फिर ईरान की लड़ाई.कारोबार पहले से ही सुस्त है, ऐसे में बंदी और नुकसान. इसका प्रभाव उद्योग-धंधों पर पड़ रहा है.
 

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