नोएडा में साइबरथुम प्रोजेक्ट के नाम पर पनवाड़ी से 1.09 करोड़ ठगे, भूटानी ग्रुप के CEO समेत 5 पर FIR 

दिल्ली के गांधी नगर में रहने वाले होरीलाल गाजियाबाद में पान की दुकान चलाते हैं. उनका का आरोप है कि उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित साइबरथुम प्रोजेक्ट में दुकान खरीदने के लिए पत्नी के गहने, गाड़ी और दुकान गिरवी रखकर 1.09 करोड़ रुपये दिए थे. लेकिन, उन्हें दुकान नहीं मिली, आरोपी उनके 30 लाख रुपये और मांग रहे हैं. कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है.

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FIR Against Bhutani Group CEO in Cyberthum Fraud Case. (AI Photo)

गाजियाबाद के एक पनवाड़ी ने नोएडा सेक्टर-90 स्थित भूटानी इंफ्रा से जुड़े अधिकारियों और प्रॉपर्टी डीलरों पर करीब एक करोड़ रुपये की ठगी का गंभीर आरोप लगाया है. कोर्ट के आदेश पर सेक्टर-142 थाने पुलिस ने दिल्ली निवासी शिवद्त शर्मा, भूटानी के सैल्स मैनेजर आदित्य राज, सक्सेना, राम एम्पायर के डायरेक्टर विदित शर्मा, राम एम्पायर के मैनेजर चिराग शर्मा, भूटानी ग्रुप के सीईओ आशीष भूटानी के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है. 

साइबरथुम प्रोजेक्ट में दिखाई दुकान 

दिल्ली के गांधी नगर में रहने वाले होरीलाल का आरोप है कि वह गाजियाबाद में पान की दुकान चलाते हैं. अपनी जमा पूंजी से एक दुकान खरीदना चाहते थे. इसे लेकर एक परिचित ने उनकी मुलाकात प्रॉपर्टी डीलर आदित्य राज सक्सेना से कराई, जिसने उन्हें एक व्यावसायिक यूनिट दिलाने का भरोसा दिलाया. आदित्य सक्सेना ने उन्हें शिवदत्त गौर शर्मा से मिलवाया और बताया कि वह ग्रेटर नोएडा स्थित साइबरथुम प्रोजेक्ट में अपनी दुकान बेचना चाहते हैं. यह दुकान करीब 272 वर्ग फीट क्षेत्रफल की बताई गई, जिसकी कीमत 65.28 लाख रुपये तय हुई.  

एफआईआर में भूटानी ग्रुप के सीईओ आशीष भूटानी का नाम.

पत्नी के गहने और गाड़ी-दुकान गिरवी रख दिए 1.09 करोड़ 

होरीलाल आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर उसे भरोसे में लिया और कैश में भुगतान करने के लिए दबाव बनाया. उन्होंने अपनी जमा पूंजी, पत्नी के गहने, गाड़ी और यहां तक कि अपनी दुकान गिरवी रखकर कुल 1.09 करोड़ रुपये अलग-अलग किश्तों में आरोपियों को दे दिए. इसमें करीब 42 लाख रुपये आदित्य सक्सेना को नकद, 27.5 लाख रुपये चिराग शर्मा को नकद, 10 लाख रुपये चेक के माध्यम से शिवदत्त को और लगभग 29.60 लाख रुपये भूटानी इंफ्रा के ऑफिस में जमा कराए गए.  

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30 लाख रुपये और मांग रहे आरोपी

आरोपियों ने स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कर लेनदेन को वैध दर्शाने का प्रयास किया और एक बिल्डर-बायर एग्रीमेंट भी तैयार कराया. हालांकि, इसके बावजूद न तो दुकान का स्वामित्व शिकायतकर्ता के नाम किया गया और न ही किसी प्रकार का वैध ट्रांसफर किया गया. उल्टा आरोपियों द्वारा अतिरिक्त 30 लाख रुपये की मांग की जा रही है. पीड़ित होरीलाल का कहना है कि आरोपी मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे हैं और भोले-भाले लोगों को प्रॉपर्टी के नाम पर ठगते हैं. मुख्य आरोपी आदित्य सक्सेना के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. 

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