विधानसभा चुनाव से पहले मुकेश सहनी की यूपी में एंट्री, संजय निषाद को दिया 6 महीने का अल्टीमेटम 

मुकेश सहनी ने कहा कि डॉ. संजय निषाद या तो छह महीने के भीतर निषाद समाज को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलाएं, या फिर बीजेपी का साथ छोड़ दें. सहनी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लिए जनता की भलाई नहीं, बल्कि केवल सत्ता महत्वपूर्ण है.

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  • VIP के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की भागीदारी का औपचारिक ऐलान किया है.
  • मुकेश सहनी ने यूपी में निषाद आरक्षण को लेकर बीजेपी और डॉ. संजय निषाद दोनों को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया है.
  • VIP ने पहले भी 2022 के यूपी चुनाव में हिस्सा लिया था लेकिन उस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था.
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देश में लोकसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ा चुनाव माना जाता है. इस बड़ी चुनावी जंग में अब करीब 10 महीने का समय बचा है. एक तरफ उत्तर प्रदेश के स्थापित राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे दल भी हैं, जो यूपी के रण में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे ही एक ‘वीआईपी' दल ने अब चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है.

उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में उतरने की घोषणा विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने की है. बिहार में मंत्री रह चुके मुकेश सहनी ने लखनऊ पहुंचकर औपचारिक रूप से यूपी के चुनावी रण में हाथ आजमाने का ऐलान किया. निषाद/मल्लाह समाज की राजनीति करने वाले और खुद को ‘सन ऑफ मल्लाह' कहने वाले मुकेश सहनी ने इस दौरान सीधे तौर पर यूपी सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद को निशाने पर लिया.

यह पहला मौका नहीं है जब मुकेश सहनी की पार्टी उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में उतरने जा रही है. इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वीआईपी ने अपने प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि, उस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और एक भी प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाया था. उस दौरान मुकेश सहनी ने चुनाव में जमकर पैसा भी खर्च किया, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए.

बदले हालात में मुकेश सहनी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था. हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में वीआईपी ने आरजेडी के साथ गठबंधन किया था. आरजेडी ने मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का दावेदार भी घोषित किया था, लेकिन बिहार में भी वीआईपी को कोई विशेष सफलता नहीं मिली. पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा और गठबंधन को भी बड़ा झटका लगा.

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लखनऊ पहुंचे मुकेश सहनी ने एक तरफ जहां बीजेपी पर निषाद आरक्षण को लेकर हमला बोला, वहीं दूसरी ओर यूपी में निषादों की राजनीति करने वाले डॉ. संजय निषाद पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि डॉ. संजय निषाद या तो छह महीने के भीतर निषाद समाज को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलाएं, या फिर बीजेपी का साथ छोड़ दें. सहनी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लिए जनता की भलाई नहीं, बल्कि केवल सत्ता महत्वपूर्ण है.

वीआईपी अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी, डॉ. संजय निषाद की राजनीतिक हत्या की तैयारी कर रही है. उन्होंने डॉ. निषाद पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके लिए सिर्फ उनका परिवार ही अहम है. मुकेश सहनी का दावा है कि वे पिछले 11 वर्षों से यूपी में निषाद आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं और यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इसी लड़ाई के कारण भाजपा ने बिहार में उनके विधायकों को खरीद लिया.

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मुकेश सहनी ने घोषणा करते हुए कहा कि वीआईपी उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत से संगठन को मजबूत करने में जुट गई है और आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी पूरी शक्ति के साथ मैदान में उतरेगी. उन्होंने डॉ. संजय निषाद को अपना बड़ा भाई बताते हुए नसीहत दी कि वे समाज के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ें. साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि वीआईपी 25 जुलाई से 101 दिन की यात्रा शुरू करेगी, जिसके जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा.

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