मायावती का यूपी में अकेले लड़ने का फैसला, जानिए BSP के इस फैसले के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

BSP सुप्रीमो मायावती ने पिछले महीने अपने जन्मदिन के मौके पर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए एक बड़ी बैठक की थी. उस बैठक से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भविष्य में गठबंधन को लेकर वो फ़ैसला इस आधार पर लेंगी कि कोई दल जब उन्हें सवर्ण वोट ट्रांसफर कराने की गारंटी दे.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
यूपी चुनाव को लेकर मायावती का बड़ा ऐलान
NDTV
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का स्पष्ट ऐलान किया है
  • मायावती ने किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया है
  • समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पुराने गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश करने का संकेत दिया है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
लखनऊ:

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी घोषणा कर दी है. मायावती ने कहा है कि BSP यूपी विधानसभा चुनाव अकेले ही लड़ेगी, किसी से कोई गठबंधन नहीं किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी के किसी से गठबंधन करने की चर्चा पूरी तरह निराधार है. हम अगले चुनाव में अकेले चुनावी मैदान में होंगे. हमारे साथ जनता है और आगामी चुनाव में इसका असर परिणाम में भी बदलता दिखेगा.

राजनीति में गठबंधन बनते हैं फिर टूटते हैं

आपको बता दें कि मायावती से पहले बीते रविवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि अम्बेडकर और लोहिया साथ काम कर सकते थे लेकिन परिस्थितियों की वजह से ऐसा नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि राजनीति में गठबंधन बनते हैं, फिर टूटते हैं और फिर बन जाते हैं. ऐसे में हम अपने पुराने गठबंधन को मज़बूत करने की कोशिश करेंगे. अखिलेश यादव के इस बयान को 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा बसपा गठबंधन से जोड़कर देखा गया और चर्चा शुरू हो गई कि सपा बसपा फिर साथ आ सकते हैं. 

मायावती ने इससे पहले क्या कहा था

BSP सुप्रीमो मायावती ने पिछले महीने अपने जन्मदिन के मौके पर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए एक बड़ी बैठक की थी. उस बैठक से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भविष्य में गठबंधन को लेकर वो फ़ैसला इस आधार पर लेंगी कि कोई दल जब उन्हें सवर्ण वोट ट्रांसफर कराने की गारंटी दे. उन्होंने कहा कि पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा, इसलिए जब उन्हें कोई ये भरोसा दे देगा कि सवर्ण वोट बीएसपी को दिलाएगा, तब गठबंधन को लेकर सोचेंगे. हालांकि अभी इसमें समय है. 

मायावती का इशारा किसकी तरफ़ था

मायावती ने जब सवर्ण वोट ट्रांसफर कराने की बात कही तो राजनैतिक चिंतकों ने कहा कि मायावती का इशारा बीजेपी की तरफ़ था. ऐसा इसलिए क्योंकि यूपी में सवर्ण वोट कभी कांग्रेस के साथ थे और वर्तमान में सवर्णों के वोट का बड़ा हिस्सा बीजेपी के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है. ऐसे में मायावती का संदेश और संकेत बीजेपी के लिए था. विशेषज्ञों ने ये भी कहा कि अखिलेश यादव ने मायावती के इसी बयान को देखते हुए नरमी दिखाई और इशारों इशारों में मायावती के साथ आने का मैसेज दे दिया. 

यूपी में कौन किसके साथ

यूपी की राजनीति में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए में चार दल हैं. ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा, डॉ संजय निषाद की निषाद पार्टी, अनुप्रिया पटेल की अपना दल (सोनेलाल) और जयंत चौधरी की लोकदल. वहीं विपक्ष में इंडिया अलायन्स में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन में हैं. अगर बात करें बीएसपी की तो 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करने और चुनाव बाद गठबंधन तोड़ने के बाद बीएसपी अब तक किसी के साथ गठबंधन में नहीं आई है.  

यह भी पढ़ें: अब साइकिल की सवारी करेंगे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, इस दिन अखिलेश यादव ज्वाइन कराएंगे पार्टी

यह भी पढ़ें: क्या 7 की तर्ज पर 27 की जंग जीतेंगी मायावती? BSP कार्यकर्ताओं को बताई रणनीति

Featured Video Of The Day
Sarvam AI CEO Pratyush Kumar: PM Modi ने पहने AI Smart Glasses! 'सिक्योरिटी मार्क क्रॉस करके..'
Topics mentioned in this article