यूपी में 1900 करोड़ के जमीन व बैंक घोटाले का पर्दाफाश, थर्मल पावर प्लांट के नाम पर हुआ बड़ा खेला

Land Scam In Uttar Pradesh: मूसानगर थाने में तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर एक एफआईआर (F.I.R.) दर्ज की गई है. इस मुकदमे में तत्कालीन एडीएम (LA) ओके सिंह, संबंधित निजी कंपनियों के मालिकों और IDBI, PNB, व केनरा बैंक के बड़े अधिकारियों को नामजद किया गया है. इन सभी पर धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति की जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं.

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  • कानपुर देहात के भोगनीपुर में थर्मल पावर प्लांट के नाम पर 400 करोड़ रुपये का भूमि घोटाला हुआ है
  • आरोपियों ने सरकारी जमीन को निजी बताकर 1500 करोड़ रुपये का लोन लेकर कुल 1900 करोड़ का घोटाला किया है
  • इस मामले में तत्कालीन एडीएम ओके सिंह, बैंक अधिकारियों व निजी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है
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UP Land Scam: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र में थर्मल पावर प्लांट के नाम पर हुए 400 करोड़ रुपये के विशाल भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद इस मामले में शामिल रसूखदारों और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है. इस मामले में सबसे बड़ी बात ये है कि आरोपियों ने इस सरकारी जमीन को निजी बताकर 1500 करोड़ रुपये का लोन लेकर डकार गए. यानी इस मामले में कुल 1900 करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया गया.

मूसानगर थाने में तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर एक एफआईआर (F.I.R.) दर्ज की गई है. इस मुकदमे में तत्कालीन एडीएम (LA) ओके सिंह, संबंधित निजी कंपनियों के मालिकों और IDBI, PNB, व केनरा बैंक के बड़े अधिकारियों को नामजद किया गया है. इन सभी पर धोखाधड़ी, सरकारी संपत्ति की जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं.

विकास के नाम पर 15 साल चला 'जालसाजी का खेल'

इस घोटाले की जड़ें साल 2011 में बोई गई थीं. उस समय हिमावत पावर और लैंको अनपरा पावर जैसी कंपनियों को सात गांवों की लगभग 2332 एकड़ जमीन इस शर्त पर आवंटित की गई थी कि वहां थर्मल पावर प्लांट लगाया जाएगा. नियम के मुताबिक, 3 साल के भीतर बिजली का उत्पादन शुरू होना था. लेकिन धरातल पर प्लांट की एक ईंट भी नहीं रखी गई, जबकि कागजों पर करोड़ों के खेल को अंजाम दिया गया.

सरकारी जमीन को निजी बताकर डकार गए 1500 करोड़ के लोन

जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कंपनियों ने सरकारी और अधिग्रहीत भूमि को अपनी निजी संपत्ति के रूप में पेश किया. तत्कालीन एडीएम ओके सिंह और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन को बैंकों के पास गिरवी रख दिया गया और 1500 करोड़ रुपये का भारी भरकम लोन ले लिया गया. भ्रष्टाचार की यह कड़ियां तब खुली, जब बैंकों ने लोन रिकवरी के लिए इस कीमती सरकारी जमीन की नीलामी प्रक्रिया शुरू की.

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भाजपा नेता की शिकायत और डीएम की सतर्कता से हुआ खुलासा

इस पूरे मामले की शिकायत भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने शासन स्तर पर की थी. इसके बाद जब जांच शुरू हुई, तो वर्तमान जिलाधिकारी कपिल सिंह ने तुरंत मोर्चा संभाला. उन्होंने न केवल इस अवैध नीलामी को रुकवाया, बल्कि पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी. सीएम योगी ने रिपोर्ट मिलते ही दोषियों पर बिना किसी देरी के 'हंटर' चलाने का आदेश दिया.

लगभग 2332 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला है ये भूमि घोटाला

यह भूमि घोटाला लगभग 2332 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत सर्किल रेट के आधार पर ₹400 करोड़ के करीब आंकी गई है. इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन एडीएम ओके सिंह को मुख्य आरोपी अधिकारी के रूप में चिह्नित किया गया है, जिनकी भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है.

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इस हेरफेर में केवल प्रशासनिक चूक ही नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसमें IDBI, केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थान शामिल पाए गए हैं. इस घोटाले का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ा है, जिससे विशेष रूप से चपरघटा, कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली जैसे गांव व्यापक रूप से प्रभावित हुए हैं. 

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