अतीक की मौत के 3 साल बाद भी परिवार के पास कहां से आ रहा पैसा, कैसे चल रहे शौक-मौज? जांच में खुला राज

जांच के मुताबिक, जमीनों की खरीद-बेच में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था. इस पूरे खेल में माफिया अतीक अहमद का पैसा लगाए जाने और उसके गुर्गों द्वारा संपत्तियों को ठिकाने लगाने की बात सामने आई है.

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अतीक अहमद के परिवार के पास कहां से आ रहा पैसा, हो रही जांच.
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  • माफिया अतीक अहमद की मौत के बाद भी उनके परिवार के पास पैसा कहां से आ रहा है, जांच में खुलासा हुआ है
  • पुलिस रिपोर्ट में राजीव नागर पर अनुसूचित जाति के नाम पर बेनामी जमीनें अवैध तरीके से दर्ज कराने के आरोप लगे हैं
  • पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने राजीव नागर के नाम की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है
लखनऊ:

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं. उसके गैंग अब ठंडे पड़ चुके है तो फिर अतीक के परिवार के पास पैसा कहां से आ रहा है. आखिर कौन से काम से अतीक के परिवार के शौक-मौज अब भी पहले की तरह ही चल रहे हैं. पुलिस ने इस मामले की जांच तेज कर दी है. जांच के दौरान कुछ ऐसी बातें पुलिस को पता चली हैं, जिनकी जानकारी लगते ही अतीक के परिवार में हड़कंप मच गया है.

अतीक और अशरफ के गुर्गे अब भी एक्टिव

कहा जा रहा है कि अतीक और अशरफ से जुड़े नेटवर्क के गुर्गे अब भी सक्रिय हैं.नई जानकारी के मुताबिक, अतीक और अशरफ से जुड़ी बेनामी जमीनों और संपत्तियों को ठिकाने लगाकर उससे मिलने वाली रकम को माफिया के परिवार तक भेजा जा रहा है. इस मामले की भनक लगते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. जिसके बाद बेनामी संपत्तियों की नए सिरे से पड़ताल शुरू कर दी गई है. इस पूरे प्रकरण की मौके पर जाकर और कागजातों के आधार पर गहन जांच करने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की एक साझा टीम बनाई गई है.

बताया जा रहा है कि प्रयागराज के एसडीएम सदर द्वारा उपलब्ध कराई गई गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है. एसडीएम सदर की ओर से जारी आदेश में चक निरातुल के रहने वाले राजीव नागर पर गंभीर आरोप लगाए गए है. आरोप है कि मौजा शाह उर्फ पीपलगांव और दामूपुर इलाके में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के नाम दर्ज जमीनों को राजीव नागर के नाम पर बेनामी संपत्ति के रूप में दर्ज कराया गया था.

पुलिस की सीक्रेट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

 प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि इन जमीनों की खरीद-फरोख्त कर जुटाया गया पैसा अतीक के करीबियों और रिश्तेदारों के जरिए उसके परिवार तक पहुंचाया जा रहा है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, परगना व तहसील सदर के  राजीव नागर ने मौजा शाह उर्फ पीपलगांव और मौजा दामूपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की बेनामी संपत्तियों को गलत तरीके से अपने और अपने करीबियों के नाम दर्ज कराया है.

 इन जमीनों की खरीद-बेच में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया था. इस पूरे खेल में माफिया अतीक अहमद का पैसा लगाए जाने और उसके गुर्गों द्वारा संपत्तियों को ठिकाने लगाने की बात सामने आई है. राजीव नागर को अतीक और उसके भाई अशरफ का करीबी बताया गया है.

बेनामी संपत्तियों से चल रहे अतीक के परिवार के शौक-मौज

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार दक्षिणी पीयूष कुशवाहा की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की एक विशेष जांच समिति गठित की गई है. इस समिति में एयरपोर्ट थाना प्रभारी राजेश उपाध्याय, राजस्व निरीक्षक अमर सिंह के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों के लेखपाल मनीष कुमार और प्रतीक पांडेय को शामिल किया गया है. यह टीम राजीव नागर के नाम मौजूद सभी संपत्तियों के अभिलेखों, मालिकाना हक, हालिया खरीद-बिक्री और वर्तमान स्थिति की विस्तृत जांच करेगी.

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इसके अलावा टीम यह भी पड़ताल करेगी कि जिन जमीनों का ट्रांसफर हुआ वो वास्तव में अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की थी या नहीं. इस प्रक्रिया में किसी कानूनी नियम का उल्लंघन तो नहीं किया गया. इस पूरे सिंडिकेट में इमरान और मोहम्मद मुस्लिम जैसे करीबियों की भूमिका की बात सामने आई है, जिन्होंने पैसों के लेन-देन और संपत्तियों के ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाई. इस पूरे मामले पर डीसीपी नगर मनीष शांडिल्य ने स्पष्ट किया है कि गठित जांच दल को अगले सात दिनों के अंदर अपनी पूरी आख्या सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पाए गए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस और प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई से अतीक नेटवर्क से जुड़े प्रॉपर्टी डीलरों और अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मच गया है.

बिना टोल दिए भगाने के मामले में भी एक्शन

वहीं अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद को लखनऊ जेल से प्रयागराज ले जाते समय उसके काफिले की गाड़ियां नवाबगंज टोल प्लाजा पर बिना टोल दिए निकल गई थीं.इस मामले में भी पुलिस ने सख्ती दिखाई है.  पुलिस ने उमर के समर्थकों पर एफआईआर तो पहले ही दर्ज कर ली थी. अब काफिले वाली दो लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं.

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मामला यूपी के प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के अख्तयारी कोटिला टोल प्लाजा का है. टोल शुल्क को लेकर काफिले में शामिल कुछ लोगों और कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था. आरोप है कि विवाद के बाद कुछ वाहनों ने टोल बैरियर तोड़ दिया और बिना टोल दिए निकल गए. पैसा मांगने पर टोल कर्मचारियों को कुछ वाहनों ने कुचलने की बी कोशिश की. 

उमर के काफिले की दो लग्जरी गाड़ियां जब्त

 टोल प्लाजा मैनेजर की शिकायत पर हथिगवां थाने में मुकदमा दर्ज हुआ. पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो काफिले में शामिल वाहनों की तलाश तेज कर दी गई.पहली स्कॉर्पियो-एन लखनऊ-प्रयागराज हाईवे की सर्विस लेन पर बरौंधा अंडरपास के पास से बरामद हुई. दूसरी स्कॉर्पियो-एन प्रयागराज के फाफामऊ इलाके के रूदापुर मलाक हरहर से पुलिस के हाथ लगी. दोनों गाड़ियों के चेसिस और इंजन नंबर का सत्यापन कराकर पुलिस ने उन्हें कब्जे में ले लिया.

 अब पुलिस की नजर टोल प्लाजा और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों पर है. फुटेज खंगालकर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय गाड़ियों में कौन-कौन सवार था और कथित घटना में किसकी क्या भूमिका थी.

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