यूपी के फिरोजाबाद में सराहनीय पहल, लंदन से लौटी महिला ने गरीब बेटियों के लिए शुरू किया फ्री इंग्लिश मीडियम शिक्षा

बेटियों के सपनों को जब सही मंच मिलता है, तो वे सिर्फ अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल देती हैं. फिरोजाबाद से यह पहल न सिर्फ शिक्षा का विस्तार है, बल्कि गरीब बेटियों के भविष्य को मजबूत करने की एक नई शुरुआत भी है.

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  • फिरोजाबाद में पहली बार बिना शुल्क के गरीब और कमजोर परिवारों की बेटियों को इंग्लिश मीडियम शिक्षा दी जा रही है
  • लंदन से लौटी माला रस्तोगी ने गरीब लड़कियों के लिए फ्री इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने की पहल की है
  • स्कूल में आधुनिक शिक्षा सुविधाओं के साथ-साथ बेटियों को कंप्यूटर और अन्य आवश्यक कौशल भी सिखाए जा रहे हैं
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फिरोजाबाद (यूपी):

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है. लंदन से भारत लौटी एक महिला ने गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए फ्री इंग्लिश मीडियम शिक्षा की मुहिम शुरू की है. इस पहल का उद्देश्य उन बेटियों को भी बेहतर और आधुनिक शिक्षा देना है, जो अब तक महंगे इंग्लिश स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रही थीं.

फिरोजाबाद के दाऊ दयाल गर्ल्स इंटर व डिग्री कॉलेज परिसर में शिक्षा की ये नई कहानी लिखी जा रही है. यह शहर का पहला ऐसा स्कूल है, जहां सिर्फ बेटियों को बिना किसी शुल्क के इंग्लिश मीडियम शिक्षा दी जा रही है. यहां बच्चियों को न केवल इंग्लिश मीडियम पढ़ाई दी जा रही है, बल्कि आधुनिक शिक्षा से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.

संस्थापिका माला रस्तोगी ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को फ्री इंग्लिश मीडियम शिक्षा देनी चाहिए, समाज में दो शिक्षा चल रही है, एक इंग्लिश मीडियम एक हिंदी मीडियम जो रिच फैमिली से हैं, वह अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ने भेजते हैं, हिंदी मीडियम में वह बच्चे पढ़ते हैं, जिनके मां-बाप इंग्लिश मीडियम की फीस नहीं दे सकते इसलिए मैंने सोचा कि हम फिरोजाबाद का सबसे पहला फ्री इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलें.

आर्थिक रूप से सक्षम परिवार तो अपने बच्चों को महंगे स्कूलों में पढ़ा लेते हैं, लेकिन गरीब परिवारों की बेटियों के लिए यह सपना अक्सर अधूरा रह जाता है. यह पहल उन सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश है, जोअब तक संसाधनों की कमी में दबे हुए थे.

शिक्षिका अरफ्शा रहमान ने कहा कि हम जो पहल चला रहे हैं फ्री इंग्लिश मीडियम स्कूल गरीब बच्चों के लिए उससे यह चेंज आया कि फ्यूचर में यह बच्ची अपने आप में कुछ बन पाएंगे, इन्हें फ्यूचर में अच्छी जॉब और अच्छा करियर मिल पाएगा.

वहीं अध्यापिका संध्या राठौर ने कहा कि हम उन लड़कियों को पढ़ा रहे हैं, इंग्लिश मीडियम शिक्षा दे रहे हैं जो बहुत ही गरीब परिवार से हैं. हमारे फिरोजाबाद में कांच का काम बहुत ज्यादा होता है तो काफी घरों में देखा जाता है कि बच्चियां खुद काम करती हैं. हम चाहते हैं कि इन बच्चियों को भी वैसे ही शिक्षा मिले, जैसी अमीर परिवार के बच्चे को मिलती है.

टीचर नीशू यादव ने कहा कि कुछ अभिभावक ऐसे होते हैं जिनके पास पैसा नहीं होता जिसकी वजह से बच्चियों की पढ़ाई रुक जाती है तो अब यह स्कूल खुला है तो हर बच्ची को शिक्षा मिलेगी इंग्लिश एक इंटरनेशनल लैंग्वेज है.

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मुस्कान छात्रा ने कहा कि मुझे कंप्यूटर चलाना बहुत अच्छा लगता है और हमारी मैडम ने कंप्यूटर में बहुत कुछ सिखाया है और कंप्यूटर नेटवर्क के बारे में भी बहुत कुछ बताया है. मेरे हिसाब से कंप्यूटर बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि पूरे वर्ल्ड में कंप्यूटर से आज बहुत काम चलता है मुझे यहां पढ़ कर बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि हम यहां पर पढ़कर हम अपने एम्स पूरे कर सकते हैं.

बेटियों के सपनों को जब सही मंच मिलता है, तो वे सिर्फ अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल देती हैं. फिरोजाबाद से यह पहल न सिर्फ शिक्षा का विस्तार है, बल्कि गरीब बेटियों के भविष्य को मजबूत करने की एक नई शुरुआत भी है.

वाकई यह पहल उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद आगे बढ़ने का हौसला रखती हैं. फिरोजाबाद से यह कहानी बता रही है कि अगर सोच सही हो तो शिक्षा से समाज की तस्वीर बदली जा सकती है.

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