शिवम दिल्ली में था तो कानपुर से कैसे गिरफ्तारी? लैंबोर्गिनी कांड में बेल के बाद इन 7 सवालों के जवाब कौन देगा?

शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी और बाद में कोर्ट से मिली जमानत के बाद अब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या पुलिस शुरू से इस मामले को जानबूझकर लापरवाही बरत रही थी.

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कानपुर लैंबोर्गिनी कांड में अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है
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  • कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसे के आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार करने में पुलिस को चार दिन का समय लगा था
  • आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के सात घंटे बाद ही कोर्ट ने जमानत दे दी है
  • मामले में ड्राइवर मोहन ने दावा किया कि वह कार चला रहा था, जबकि चश्मदीदों ने शिवम को चालक बताया है
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कानपुर:

कानपुर के हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे में गिरफ्तार आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट ने गुरुवार को जमानत दे दी है. शिवम को उसकी गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही जमानत मिल गई है. जबकि आपको बता दें कि इस मामले में आरोपी शिवम को गिरफ्तार करने में पुलिस को करीब चार दिन का समय लगा था. लेकिन कोर्ट में पुलिस की कोई दलील नहीं चली और शिवम जमानत पर रिहा हो गया. आरोपी को गिरफ्तारी के करीब सात घंटे बाद भले ही जमानत मिल गई हो लेकिन इस मामले में अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है. 

इस मामले से जुड़ा पहला सवाल तो ये कि अब जब शिवम मिश्रा को जमानत मिल गई है तो लैंबोर्गिनी कौन चला रहा था. चश्मदीद कह रहे हैं कि शिवम कार चला रहा था. पुलिस की तफ्तीश भी यही बताती है. लेकिन अब ड्राइवर मोहन का दावा है कि कार वो चला रहा था. उसके दावे में कितनी सच्चाई है ये एक जांच का मामला है. दूसरा सवाल ये कि क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मामले का सामने आने से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी तक पुलिस एक के बाद एक कई गलतियां करती जा रही है. मसलन, आरोपी की समय रहते मेडिकल जांच क्यों नहीं कराई गई. चश्मीदीदों का दावा है कि घटना के समय आरोपी नशे में था. लेकिन पुलिस ने उस दौरान समय रहते उसका मेडिकल नहीं करवाया तो ऐसे में अब इसका पता नहीं चल सकता कि घटना के ठीक बाद वो नशे में था या नहीं. 

तीसरी सवाल ये है कि जब घटना के बाद शिवम गंभीर रूप से घायल नहीं था तो उसे पुलिस ने उसी समय क्यों नहीं पकड़ा? उसे बाउंसर अपने साथ क्यों लेकर चले गए. साथ ही पुलिस ने तुरंत ये पता लगाने की कोशिश क्यों नहीं की कि शिवम को उस हालात में क्या किसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था? उन बाउंसर्स से भी पूछताछ क्यों नहीं की गई जो शिवम को लेकर गए थे. चौथा सवाल ये कि पुलिस के सामने आरोपी के परिवार ने बार-बार बयान क्यों बदलता? क्या पुलिस को गुमराह किया जा रहा था? ऐसा इसलिए भी क्योंकि परिवार ने पहले कहा था कि शिवम का अस्पताल में इलाज चल रहा है लेकिन उस दौरान ये नहीं बताया गया कि इलाज किस अस्पताल में चल रहा है. इसके बाद बताया गया कि शिवम दिल्ली में है. अगर परिवार की ही बात को सही माने तो जब शिवम को उसका परिवार अस्पताल से दिल्ली ले जा रहा था तो उस दौरान पुलिस क्या कर रही थी? उस समय उसे गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की गई? 

पांचवां और सबसे अहम सवाल ये कि अगर इस पूरे मामले में शिवम की कोई गलती ही नहीं थी तो करीब चार दिनों तक पुलिस से बचता क्यों फिर रहा था? वो खुद पुलिस के सामने क्यों नहीं आया या उसके परिवार ने शिवम के बारे में सही जानकारी पुलिस को क्यों नहीं दी. एक सवाल ये भी कि शिवम आखिर दिल्ली से कानपुर के अस्पताल में कैसे पहुंचा? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि शिवम के परिवार ने कहा था कि शिवम दिल्ली में था. जबकि पुलिस कह रही है कि उसकी गिरफ्तारी कानपुर के पारस अस्पताल से की गई है. आखिरी और सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस मामले में अब आगे क्या होगा. क्योंकि शिवम को कोर्ट से फिलहाल जमानत मिल गई है.

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